कलेक्टर कुणाल दुदावत के निर्देश पर कार्रवाई, गैस-पेट्रोल की कमी की अफवाहों से बचने की अपील
कोरबा, 11 मार्च 2026।
जिले में घरेलू रसोई गैस सिलेंडरों के अवैध व्यावसायिक उपयोग पर रोक लगाने के लिए जिला प्रशासन ने सख्ती शुरू कर दी है। कलेक्टर श्री कुणाल दुदावत के निर्देश पर राजस्व एवं खाद्य विभाग की संयुक्त टीम द्वारा विशेष जांच अभियान चलाया जा रहा है।
इसी अभियान के तहत बुधवार को ट्रांसपोर्ट नगर, कोरबा स्थित एक व्यावसायिक प्रतिष्ठान “सेंटर प्वाइंट” का निरीक्षण किया गया। जांच के दौरान प्रतिष्ठान में व्यावसायिक कार्यों के लिए घरेलू गैस सिलेंडरों का उपयोग पाया गया। टीम को मौके पर 6 घरेलू गैस सिलेंडर (3 भरे हुए और 3 खाली) मिले, जो नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है।
प्रशासन ने मामले को गंभीर मानते हुए संबंधित प्रतिष्ठान के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि घरेलू उपभोक्ताओं के लिए उपलब्ध सब्सिडी वाले गैस सिलेंडरों का व्यावसायिक उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित है और ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई की जाएगी।
गैस की कमी की अफवाहों से बचने की अपील
इधर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे संघर्ष को लेकर रसोई गैस, पेट्रोल और डीजल की संभावित कमी संबंधी अफवाहों को देखते हुए जिला प्रशासन सतर्क हो गया है। कलेक्टर श्री दुदावत ने गैस वितरक एजेंसियों की बैठक लेकर स्पष्ट किया कि जिले में घरेलू एलपीजी गैस का पर्याप्त भंडारण उपलब्ध है और किसी प्रकार की कमी नहीं है।
बैठक में सभी गैस एजेंसियों को पारदर्शी वितरण व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए गए। कलेक्टर ने कहा कि गैस सिलेंडर की डिलीवरी बुकिंग तिथि के क्रम और “फर्स्ट कम, फर्स्ट सर्व” के आधार पर ही की जाए। साथ ही हर सिलेंडर की डिलीवरी ओटीपी ऑथेंटिकेशन के माध्यम से ही सुनिश्चित की जाएगी।
ब्लैक मार्केटिंग और अवैध भंडारण पर सख्त कार्रवाई
प्रशासन ने चेतावनी दी है कि एलपीजी सिलेंडरों के अवैध भंडारण, ब्लैक मार्केटिंग या अधिक कीमत पर बिक्री जैसी गतिविधियों को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सभी गैस एजेंसियों को प्रतिदिन अपने स्टॉक की जानकारी खाद्य विभाग को देने के निर्देश भी दिए गए हैं।
कलेक्टर ने यह भी कहा कि स्कूल, आश्रम, छात्रावास और अस्पतालों को प्राथमिकता के आधार पर गैस सिलेंडर की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए।
जिला प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे गैस, पेट्रोल या डीजल की कमी को लेकर फैल रही भ्रामक खबरों और अफवाहों पर विश्वास न करें तथा किसी भी जानकारी की पुष्टि केवल अधिकृत शासकीय स्रोतों से ही करें।




