
कोरबा, 31 जुलाई 2026। मानसून के दौरान जहां लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिली है, वहीं मौसमी और जलजनित बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एस.एन. केशरी ने बताया कि बारिश के मौसम में तापमान में उतार-चढ़ाव और जलभराव के कारण बैक्टीरिया तथा मच्छरों का प्रकोप बढ़ जाता है, जिससे बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी आयु वर्ग के लोग बीमारियों की चपेट में आ सकते हैं।
उन्होंने बताया कि वर्षाकाल में मलेरिया, डेंगू, डायरिया (हैजा), टाइफाइड, हेपेटाइटिस-ए तथा त्वचा संबंधी रोगों का खतरा अधिक रहता है। विशेष रूप से जलभराव वाले क्षेत्रों में मच्छरों का प्रजनन तेजी से होता है, जिससे मलेरिया और डेंगू जैसी गंभीर बीमारियां फैलने की आशंका बढ़ जाती है। वहीं दूषित भोजन और पानी के सेवन से डायरिया, टाइफाइड तथा हेपेटाइटिस-ए जैसी जलजनित बीमारियां हो सकती हैं।
सीएमएचओ ने लोगों से स्वच्छता अपनाने और पौष्टिक भोजन का सेवन कर शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत रखने की अपील की है। उन्होंने सलाह दी कि भोजन से पहले और शौचालय के उपयोग के बाद साबुन से हाथ अवश्य धोएं, नाखून साफ रखें, उबालकर या शुद्ध पानी ही पिएं तथा बाहर के खुले और अस्वच्छ खाद्य पदार्थों से परहेज करें। फल और सब्जियों को अच्छी तरह धोकर ही उपयोग करें तथा कटे फल, चाट, गोलगप्पे, दही और रायता जैसी खुली खाद्य सामग्री खाने से बचें।
उन्होंने कहा कि सर्दी-जुकाम और संक्रमण से बचाव के लिए अदरक, तुलसी, काली मिर्च, दालचीनी और इलायची से बनी चाय लाभदायक हो सकती है। वहीं बारिश में भीगने के बाद तुरंत सूखे कपड़े पहनें और त्वचा को साफ एवं सूखा रखें ताकि त्वचा संबंधी संक्रमण से बचा जा सके।
कलेक्टर श्री कुणाल दुदावत और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने जिलेवासियों से अपील की है कि यदि किसी व्यक्ति में मलेरिया, डायरिया, टाइफाइड, हेपेटाइटिस या त्वचा रोग के लक्षण दिखाई दें तो बिना देर किए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में जाकर उपचार कराएं। साथ ही स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और मितानिनों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने कार्यक्षेत्र में जलजनित एवं मौसमी बीमारियों की रोकथाम के लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाएं।

