Friday, August 21, 2026
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बांकीमोंगरा–ढेलवाडीह सड़क: विकास से पहले सुरक्षा की जरूरत

प्रणय मिश्रा

हादसों का रास्ता कब बनेगा सुरक्षित?

बांकीमोंगरा से ढेलवाडीह होते हुए कटघोरा और बिलासपुर को जोड़ने वाला मार्ग क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। यह सड़क केवल आवागमन का साधन नहीं, बल्कि आसपास के गांवों, औद्योगिक क्षेत्रों और शहरों को जोड़ने वाली एक प्रमुख कड़ी है। इसके बावजूद बांकीमोंगरा से ढेलवाडीह के बीच का हिस्सा सड़क सुरक्षा के लिहाज से गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है।

इस मार्ग पर लगातार बढ़ता यातायात और सड़क की मौजूदा स्थिति दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ा रही है। विशेष रूप से रात के समय स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो जाती है।

सिंगल लेन सड़क और बढ़ता यातायात

बांकीमोंगरा–ढेलवाडीह मार्ग का बड़ा हिस्सा अभी भी सिंगल लेन है। आमने-सामने से आने वाले भारी वाहनों, कारों, मोटरसाइकिलों और अन्य वाहनों के कारण कई स्थानों पर सड़क पर सुरक्षित तरीके से क्रॉसिंग करना मुश्किल हो जाता है।

जब सड़क पर यातायात लगातार बढ़ रहा हो, तब केवल वाहन चालकों को जिम्मेदार ठहराना पर्याप्त नहीं है। सड़क की संरचना, प्रकाश व्यवस्था, संकेतक और यातायात नियंत्रण भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।

अंधेरा बढ़ाता है दुर्घटना का खतरा

इस मार्ग की एक बड़ी समस्या पर्याप्त स्ट्रीट लाइट और रोड लाइटिंग का अभाव है। रात के समय सड़क के कई हिस्से अंधेरे में डूब जाते हैं। ऐसे में सामने से आने वाले वाहन, सड़क किनारे खड़े वाहन, पैदल यात्री अथवा अचानक सड़क पर आने वाले मवेशी समय पर दिखाई नहीं देते।

खासकर बांकीमोंगरा प्रवेश क्षेत्र और ढेलवाडीह की ओर जाने वाले हिस्सों में बेहतर प्रकाश व्यवस्था दुर्घटनाओं को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

शराब पीकर वाहन चलाना भी गंभीर चुनौती

सड़क दुर्घटनाओं के पीछे ड्रिंक एंड ड्राइव भी एक गंभीर कारण हो सकता है। शराब के प्रभाव में वाहन चलाने से चालक की निर्णय क्षमता, प्रतिक्रिया का समय और वाहन पर नियंत्रण प्रभावित होता है।

इस मार्ग पर नियमित जांच, विशेषकर रात के समय, और शराब पीकर वाहन चलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सड़क सुरक्षा को मजबूत कर सकती है।

स्पीड लिमिट और चेतावनी संकेतक जरूरी

सड़क पर पर्याप्त स्पीड लिमिट बोर्ड, दुर्घटना संभावित क्षेत्र के संकेतक, मोड़ के चेतावनी बोर्ड, रिफ्लेक्टर और कैट्स आई लगाए जाने चाहिए।

चालक को पहले से यह जानकारी मिलनी चाहिए कि आगे मोड़ है, आबादी वाला क्षेत्र है, स्कूल या बाजार क्षेत्र है अथवा दुर्घटना संभावित स्थान है।

सड़क सुरक्षा का पहला नियम यही है—चालक को खतरे की जानकारी खतरा आने से पहले मिलनी चाहिए।

बांकीमोंगरा प्रवेश द्वार पर चौक बने तो बदल सकती है तस्वीर

बांकीमोंगरा प्रवेश द्वार पर व्यवस्थित चौक/जंक्शन का निर्माण भी यातायात नियंत्रण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। यहां पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था, रोड मार्किंग, ट्रैफिक संकेतक, रिफ्लेक्टर और आवश्यकतानुसार स्पीड ब्रेकर की व्यवस्था की जाए तो वाहनों की गति नियंत्रित की जा सकती है।

चौक का निर्माण केवल सौंदर्यीकरण के लिए नहीं, बल्कि यातायात प्रबंधन और दुर्घटना रोकथाम को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।

सड़क चौड़ीकरण के साथ सुरक्षा सुधार भी जरूरी

भविष्य में यदि इस मार्ग के चौड़ीकरण की योजना बनती है तो उसे केवल सड़क की चौड़ाई बढ़ाने तक सीमित नहीं रखना चाहिए। सड़क के साथ—

  • पर्याप्त स्ट्रीट लाइट
  • स्पष्ट रोड मार्किंग
  • स्पीड लिमिट संकेतक
  • रिफ्लेक्टिव साइन बोर्ड
  • कैट्स आई और रोड स्टड
  • आवश्यक स्थानों पर स्पीड ब्रेकर
  • सुरक्षित जंक्शन
  • पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित व्यवस्था
  • दुर्घटना संभावित स्थानों की पहचान

जैसी व्यवस्थाओं को भी योजना का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।

सवाल सड़क का नहीं, सैकड़ों जिंदगियों का है

हर दुर्घटना के बाद कुछ समय के लिए चर्चा होती है। जिम्मेदारी तय करने की मांग उठती है और फिर मामला धीरे-धीरे शांत हो जाता है। लेकिन किसी परिवार ने जब अपने सदस्य को सड़क दुर्घटना में खो दिया हो, उसके लिए यह केवल एक खबर नहीं, बल्कि पूरी जिंदगी का दर्द है।

इसलिए जरूरत है कि दुर्घटना होने का इंतजार करने के बजाय दुर्घटना की संभावना को पहले ही खत्म करने की कोशिश की जाए।

बांकीमोंगरा–ढेलवाडीह मार्ग को सुरक्षित बनाने के लिए प्रशासन, लोक निर्माण विभाग, नगर पालिका, पुलिस और जनप्रतिनिधियों को संयुक्त रूप से गंभीर पहल करनी चाहिए।

संपादकीय निष्कर्ष

सड़क केवल वाहनों के चलने के लिए नहीं होती, वह लोगों को उनके घर और परिवार तक सुरक्षित पहुंचाने का माध्यम भी होती है।

बांकीमोंगरा–ढेलवाडीह मार्ग की मौजूदा चुनौतियों को देखते हुए अब तत्काल सुरक्षा ऑडिट कराया जाना चाहिए। जहां आवश्यकता हो वहां सड़क चौड़ीकरण, प्रकाश व्यवस्था, चौक निर्माण, स्पीड लिमिट संकेतक और अन्य सुरक्षा उपाय किए जाने चाहिए। साथ ही ड्रिंक एंड ड्राइव तथा तेज गति पर प्रभावी निगरानी जरूरी है।

आज किए गए ये छोटे-छोटे सुधार कल किसी बड़े हादसे को रोक सकते हैं। एक सुरक्षित सड़क केवल यातायात को सुगम नहीं बनाती, बल्कि कई परिवारों को उजड़ने से बचाती है।

प्रशासन को यह पहल हादसे के बाद नहीं, हादसे से पहले करनी होगी।

— प्रणय मिश्रा

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