Wednesday, October 21, 2026
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बांकी मोंगरा-कुसमुंडा में बिजली समस्या को लेकर जनप्रतिनिधियों ने खोला मोर्चा

हल्की हवा और बारिश में गुल हो जाती है बिजली, घंटों कटौती से जनता परेशान; सात दिन में समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन की चेतावनी

बांकी मोंगरा। बांकी मोंगरा एवं कुसमुंडा क्षेत्र में लगातार बनी बिजली संबंधी समस्याओं को लेकर नगर पालिका परिषद बांकी मोंगरा के नेता प्रतिपक्ष एवं पार्षद मधुसूदन दास सहित कई पार्षदों और जनप्रतिनिधियों ने विद्युत विभाग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। जनप्रतिनिधियों ने दर्री जोन कार्यालय (सीएसईबी) के मुख्य अधिकारी को पत्र सौंपकर क्षेत्र की विद्युत व्यवस्था में तत्काल सुधार करने की मांग की है। साथ ही स्पष्ट किया है कि यदि सात दिनों के भीतर समस्याओं का निराकरण नहीं किया गया तो आंदोलन किया जाएगा।

हल्की हवा और बारिश में बिजली गुल होने से लोग परेशान

जनप्रतिनिधियों ने अपने पत्र में कहा है कि बांकी मोंगरा एवं कुसमुंडा क्षेत्र में बिजली से जुड़ी समस्याएं लंबे समय से बनी हुई हैं। स्थिति यह है कि हल्की हवा चलने या बारिश की कुछ बूंदें गिरने के साथ ही बिजली व्यवस्था प्रभावित हो जाती है। कई बार मौसम सामान्य होने के बावजूद बिजली घंटों तक बंद रहती है।

लगातार बिजली कटौती का सीधा असर आम लोगों की दिनचर्या पर पड़ रहा है। घरेलू कामकाज से लेकर दुकानों, छोटे व्यवसायों, विद्यार्थियों और अन्य जरूरी गतिविधियों पर इसका असर देखने को मिल रहा है। गर्मी और उमस के बीच लंबे समय तक बिजली बंद रहने से बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को भी परेशानी उठानी पड़ती है।

बैठक के बाद भी समस्या जस की तस

पत्र में जनप्रतिनिधियों ने उल्लेख किया है कि कुछ माह पूर्व नगर पालिका परिषद बांकी मोंगरा कार्यालय में बिजली संबंधी समस्याओं को लेकर बैठक आयोजित की गई थी। बैठक में क्षेत्र की बिंदुवार विद्युत समस्याओं का एक महीने के भीतर निराकरण करने की बात कही गई थी।

लेकिन निर्धारित समय बीत जाने के बाद भी जमीनी स्थिति में अपेक्षित बदलाव नहीं होने की बात जनप्रतिनिधियों ने कही है। उनका कहना है कि बैठक में समस्याओं के समाधान को लेकर आश्वासन तो मिला, लेकिन धरातल पर खराब खंभे, लटके हुए तार और अन्य विद्युत संबंधी समस्याएं अब भी बनी हुई हैं।

खराब खंभे और लटके तार बन रहे परेशानी का कारण

जनप्रतिनिधियों के अनुसार क्षेत्र के कई हिस्सों में विद्युत व्यवस्था से जुड़ी आधारभूत समस्याओं का समाधान जरूरी है। खराब खंभों को बदलने, लटकते तारों को व्यवस्थित करने तथा बार-बार होने वाली बिजली कटौती की समस्या को दूर करने की आवश्यकता है।

जनप्रतिनिधियों का कहना है कि जब उपभोक्ताओं से बिजली बिल की नियमित वसूली की जाती है तो उन्हें भी अपेक्षा रहती है कि उन्हें सुरक्षित और निर्बाध विद्युत आपूर्ति मिले। बार-बार बिजली बंद होने से उपभोक्ताओं में नाराजगी बढ़ रही है।

जनता की परेशानी को लेकर जनप्रतिनिधियों ने जताई चिंता

क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों का कहना है कि बिजली जैसी मूलभूत सुविधा में बार-बार व्यवधान आम जनता के लिए गंभीर परेशानी का विषय है। खासकर बारिश और हवा के दौरान विद्युत व्यवस्था प्रभावित होने से लोगों को पहले से ही आशंका बनी रहती है कि मौसम बदलते ही बिजली बंद हो जाएगी।

स्थानीय लोगों का कहना है कि बिजली गुल होने के बाद कब आपूर्ति बहाल होगी, इसकी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिलती, जिससे परेशानी और बढ़ जाती है। कई बार लंबे समय तक आपूर्ति बाधित रहने के कारण लोग विभागीय व्यवस्था को लेकर सवाल उठाते रहे हैं।

सात दिन का अल्टीमेटम, समाधान नहीं तो आंदोलन

नेता प्रतिपक्ष मधुसूदन दास सहित जनप्रतिनिधियों ने विद्युत विभाग को सात दिनों की समयसीमा देते हुए क्षेत्र की समस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर निराकरण करने की मांग की है।

पत्र में कहा गया है कि यदि सात दिनों के भीतर बिजली संबंधी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो जनप्रतिनिधियों द्वारा आंदोलन किया जाएगा। आंदोलन की स्थिति में उत्पन्न होने वाली परिस्थितियों की जिम्मेदारी संबंधित विभाग की होगी, ऐसा पत्र में उल्लेख किया गया है।

कलेक्टर और एसपी को भी भेजी गई प्रतिलिपि

मामले की गंभीरता को देखते हुए पत्र की प्रतिलिपि नगर पालिका परिषद बांकी मोंगरा की मुख्य नगर पालिका अधिकारी ज्योत्सना चरणदास महंत, जिला कलेक्टर कोरबा तथा जिला पुलिस अधीक्षक कोरबा को भी भेजी गई है, ताकि क्षेत्र की विद्युत समस्या का संज्ञान लेकर आवश्यक कार्रवाई की जा सके।

पत्र पर नेता प्रतिपक्ष मधुसूदन दास, तेजप्रताप   यशपाल कंवर, संजय आजाद ,पार्षद राजकुमार मिश्रा, राजकुमारी, संदीप कुमार, तालिका साहू सहित अन्य जनप्रतिनिधियों के हस्ताक्षर हैं। जनप्रतिनिधियों ने कहा है कि यह मुद्दा किसी एक व्यक्ति की समस्या नहीं, बल्कि बांकी मोंगरा-कुसमुंडा क्षेत्र में रहने वाले आम नागरिकों से जुड़ी मूलभूत सुविधा का विषय है।

अब देखना होगा कि विद्युत विभाग सात दिनों की समयसीमा के भीतर इन शिकायतों पर क्या कार्रवाई करता है और क्षेत्र की लंबे समय से चली आ रही बिजली समस्या का समाधान किस स्तर तक हो पाता है।

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