
दो साल से अधिक पुराने जन्म-मृत्यु के पंजीयन के लिए प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश अनिवार्य, एक से दो साल की देरी पर जिला मजिस्ट्रेट की अनुमति जरूरी
रायपुर, 13 अक्टूबर 2026।
जन्म या मृत्यु का पंजीयन समय पर नहीं करा पाए हैं, तो अब पुराने मामलों में पंजीयन कराने के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा। केंद्र सरकार द्वारा जन्म एवं मृत्यु पंजीयन अधिनियम में किए गए संशोधन के बाद विलंब से पंजीयन कराने के नियमों में बदलाव किया गया है। नए प्रावधानों के अनुसार, एक साल से अधिक और दो साल तक की देरी होने पर जिला मजिस्ट्रेट या अधिकृत मजिस्ट्रेट का आदेश जरूरी होगा। वहीं, दो साल से अधिक पुराने मामलों में प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद ही पंजीयन किया जा सकेगा।
राज्य शासन के निर्देश पर आर्थिक एवं सांख्यिकी संचालनालय, छत्तीसगढ़ ने संशोधित नियमों के पालन के लिए आवश्यक निर्देश जारी किए हैं। सरगुजा कलेक्टर एवं अतिरिक्त मुख्य रजिस्ट्रार (जन्म-मृत्यु) ने भी संबंधित अधिकारियों को नए प्रावधानों का तत्काल पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।
देरी के हिसाब से तय होगी पंजीयन की प्रक्रिया
संशोधित नियमों के अनुसार जन्म या मृत्यु के पंजीयन में देरी होने पर अब अलग-अलग स्तर पर अनुमति लेनी होगी।
- एक साल तक की देरी: इस अवधि में लागू सामान्य विलंबित पंजीयन प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई होगी।
- एक से दो साल के भीतर: जिला मजिस्ट्रेट, डिवीजनल मजिस्ट्रेट या जिला मजिस्ट्रेट द्वारा अधिकृत कार्यकारी मजिस्ट्रेट का आदेश जरूरी होगा।
- दो साल से अधिक की देरी: प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट का आदेश मिलने के बाद ही जन्म या मृत्यु का पंजीयन किया जा सकेगा।
संबंधित क्षेत्र के जन्म-मृत्यु रजिस्ट्रार सक्षम प्राधिकारी के आदेश के आधार पर पंजीयन की प्रक्रिया पूरी करेंगे।
अधिनियम में संशोधन के बाद लागू हुए नए प्रावधान
जन्म एवं मृत्यु पंजीयन अधिनियम, 1969 की धारा 13 में संशोधन कर विलंब से मिलने वाली सूचनाओं के पंजीयन की प्रक्रिया को स्पष्ट किया गया है। इसका उद्देश्य पुराने मामलों में पंजीयन को निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत व्यवस्थित करना है।
प्रशासन ने अधिकारियों को संशोधित नियमों का पालन करने के निर्देश दिए हैं। ऐसे में जिन लोगों के जन्म या परिवार के किसी सदस्य की मृत्यु का पंजीयन लंबे समय से नहीं हुआ है, उन्हें आवेदन करने से पहले देरी की अवधि के अनुसार सक्षम प्राधिकारी के आदेश की आवश्यकता की जानकारी लेनी चाहिए।
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