प्रणय मिश्रा
रायपुर, 10 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ में आदिवासी भूमि को गैर-आदिवासियों के अप्रत्यक्ष नियंत्रण में जाने से रोकने के लिए शासन ने सख्ती बढ़ा दी है। अब गैर-आदिवासियों द्वारा आदिवासी जमीन सीधे अपने नाम खरीदने के बजाय नौकर, परिचित, रिश्तेदार या अन्य व्यक्तियों के नाम पर खरीदी गई जमीनों की जांच की जाएगी। यदि जमीन का वास्तविक कब्जा, उपयोग या आर्थिक लाभ किसी गैर-आदिवासी द्वारा लिया जाना पाया गया, तो ऐसे मामलों में नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
छत्तीसगढ़ राज्य अनुसूचित जनजाति आयोग के प्रस्ताव के बाद महानिरीक्षक पंजीयन, छत्तीसगढ़ ने कलेक्टरों को पत्र जारी कर इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश दिए हैं।
प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष हस्तांतरण की होगी जांच
जिला प्रशासन को आदिवासी भूमि के प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष हस्तांतरण की जांच कराने के निर्देश दिए गए हैं। खासतौर पर ऐसे मामलों की पड़ताल होगी, जहां आदिवासी से जमीन किसी नौकर, परिचित, रिश्तेदार अथवा अन्य व्यक्ति के नाम खरीदी गई हो, लेकिन उसका वास्तविक उपयोग या आर्थिक लाभ किसी गैर-आदिवासी को मिल रहा हो।
जांच पूरी होने तक संदिग्ध एवं नियम-विरुद्ध पंजीयन या नामांतरण वाली भूमि के आगे के हस्तांतरण पर नियमानुसार रोक लगाने को भी कहा गया है।
रजिस्ट्री से पहले दस्तावेजों की होगी बारीकी से जांच
शासन ने पंजीयन अधिकारियों को रजिस्ट्री के दौरान दस्तावेजों की सूक्ष्म जांच के निर्देश दिए हैं। पंजीयन के लिए प्रस्तुत दस्तावेजों का रजिस्ट्रीकरण अधिनियम की धारा 34 और 35 तथा संबंधित नियमों के प्रावधानों के अनुरूप परीक्षण किया जाएगा। क्रेता, विक्रेता और गवाहों की पहचान भी नियमानुसार सुनिश्चित करनी होगी।
नक्शा और राजस्व अभिलेखों का सत्यापन जरूरी
पंजीयन दस्तावेजों में आवश्यक नक्शा एवं रेखांकन लेने के साथ सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी राजस्व अभिलेख और बिक्री नकल का सत्यापन अनिवार्य किया गया है। छोटे-छोटे भूखंडों की रजिस्ट्री में विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश हैं। अभिलेखों में किसी तरह की शंका होने पर संबंधित तहसीलदार से सत्यापन कराया जाएगा।
एक ही व्यक्ति के बार-बार गवाह बनने पर भी नजर
शासन के संज्ञान में ऐसे मामले भी आए हैं, जिनमें एक ही व्यक्ति कई दस्तावेजों में बार-बार गवाह या पहचानकर्ता बना है। इसे गंभीरता से लेते हुए गवाहों की पहचान में पूरी सावधानी बरतने और वास्तविक पहचानकर्ता को ही स्वीकार करने के निर्देश दिए गए हैं।
कानून के खिलाफ सौदा मिला तो जमीन होगी बहाल
सरकार का फोकस केवल भविष्य के संदिग्ध सौदों को रोकने तक सीमित नहीं है। पहले हुए ऐसे मामलों की भी जांच की जाएगी। जांच में यदि कोई भूमि हस्तांतरण कानून के विपरीत पाया जाता है, तो नियमानुसार भूमि को पुनः आदिवासी खातेदार के पक्ष में बहाल करने की कार्रवाई की जाएगी।
इसके साथ ही आदिवासी भूमि से जुड़ी शिकायतों की समयबद्ध जांच और कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए राज्य स्तर पर निगरानी व्यवस्था मजबूत करने पर भी जोर दिया गया है।


