


कोरबा, 13 अप्रैल 2026 / छत्तीसगढ़ शासन के वाणिज्य, उद्योग, आबकारी, सार्वजनिक उपक्रम एवं श्रम मंत्री श्री लखनलाल देवांगन के मुख्य आतिथ्य में आज कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) कोरबा की शासी परिषद की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता कलेक्टर एवं पदेन अध्यक्ष श्री कुणाल दुदावत ने की।
बैठक में वित्तीय वर्ष 2026-27 के स्वीकृत कार्यों की प्रगति की समीक्षा, पूर्ण कार्यों की कार्योत्तर स्वीकृति तथा आगामी वर्ष की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा कर अनुमोदन प्रदान किया गया। इस दौरान सांसद श्रीमती ज्योत्सना महंत, विधायक श्री प्रेमचंद पटेल, श्री तुलेश्वर सिंह मरकाम, श्री फूल सिंह राठिया, जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. पवन कुमार सिंह और महापौर श्रीमती संजू देवी राजपूत सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी उपस्थित रहे।
विकास कार्यों को मिलेगी प्राथमिकता
मंत्री श्री देवांगन ने कहा कि डीएमएफ मद से कोरबा जिले में अतिरिक्त विकास सुनिश्चित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि स्वीकृत कार्यों में स्कूल, आंगनबाड़ी भवन, स्वास्थ्य सेवाएं, पेयजल व्यवस्था, सड़क निर्माण तथा पुल-पुलियों के निर्माण जैसे महत्वपूर्ण कार्य शामिल हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी कार्य समय-सीमा में और गुणवत्ता के साथ पूर्ण किए जाएं, ताकि आमजन को शीघ्र लाभ मिल सके।
उन्होंने पीवीटीजी समुदाय के लिए प्राथमिकता से विकास कार्य किए जाने पर संतोष व्यक्त करते हुए जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों से समन्वय बनाकर कार्य करने की अपील की।
पर्यावरण और मूलभूत सुविधाओं पर जोर
सांसद श्रीमती ज्योत्सना महंत ने खनन प्रभावित क्षेत्र होने के कारण प्रदूषण नियंत्रण, राखड़ बांधों से उत्पन्न समस्याओं के समाधान तथा पर्यावरण संरक्षण पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई। साथ ही उन्होंने गर्मी के मौसम में पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने और ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने पर जोर दिया।
रोजगार और कौशल विकास पर फोकस
कटघोरा विधायक श्री प्रेमचंद पटेल ने डीएमएफ राशि से कौशल विकास, रोजगार सृजन और कृषि क्षेत्र में दलहन-तिलहन उत्पादन को बढ़ावा देने की बात कही। वहीं पाली-तानाखार विधायक श्री तुलेश्वर मरकाम ने डीएमएफ निर्माण पोर्टल को जनहित में उपयोगी पहल बताया।
डीएमएफ के तहत 70% राशि प्राथमिक कार्यों पर खर्च
कलेक्टर श्री कुणाल दुदावत ने बताया कि डीएमएफ नियमों के तहत 70 प्रतिशत राशि शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल और पर्यावरण संरक्षण जैसे उच्च प्राथमिकता वाले कार्यों पर तथा 30 प्रतिशत राशि अन्य आधारभूत संरचनाओं पर व्यय की जाएगी। जिले के 5 विकासखंडों के 564 गांवों को प्रत्यक्ष प्रभावित क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया गया है।
उन्होंने जानकारी दी कि एसईसीएल की खदानों से प्रभावित 20,069 परिवारों और 4,102 विस्थापित परिवारों के लिए योजनाएं तैयार की जा रही हैं। वर्ष 2025-26 में 519.11 करोड़ रुपये की प्राप्ति के विरुद्ध 1498 कार्यों के लिए 529.24 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है।
कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मिली मंजूरी
बैठक में खनन प्रभावित क्षेत्रों के निर्धारण, प्रभावित एवं विस्थापित परिवारों की सूची अनुमोदन, पंचवर्षीय कार्ययोजना, एंडोमेंट फंड गठन, परियोजना प्रबंधन इकाई के चयन, प्रशासनिक व्यय स्वीकृति सहित कई प्रस्तावों को मंजूरी दी गई।
इसके साथ ही डिजिटल सशक्तिकरण को बढ़ावा देते हुए वेबसाइट, वेब पोर्टल, डाटा प्रबंधन प्रणाली, थर्ड पार्टी ऑडिट, टोल-फ्री नंबर स्थापना, वीसी रूम निर्माण और डॉक्यूमेंट्री निर्माण जैसे प्रस्तावों को भी स्वीकृति प्रदान की गई।
कुल मिलाकर, डीएमएफ के माध्यम से कोरबा जिले में खनन प्रभावित क्षेत्रों के समग्र विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।

