
वैज्ञानिकों ने एक नए अध्ययन में ब्लैक होल और आकाशगंगाओं के बीच संबंध को लेकर महत्वपूर्ण खोज की है। इस शोध में बताया गया है कि बहुत छोटी आकाशगंगाओं में भी ब्लैक होल मौजूद हो सकते हैं और उनका व्यवहार बड़े ब्लैक होल जैसा ही होता है।
अध्ययन में “M–σ संबंध” (ब्लैक होल का द्रव्यमान और तारों की गति के बीच संबंध) को पहले से ज्यादा व्यापक दायरे में समझाया गया है। इसमें तारों की गति 10 km/s से लेकर 300 km/s तक के डेटा को शामिल किया गया है। वैज्ञानिकों ने पाया कि इस संबंध को छोटी से बड़ी सभी आकाशगंगाओं पर लागू किया जा सकता है।
चित्र में नीले बिंदु ब्लैक होल के द्रव्यमान को दर्शाते हैं, जबकि पीले और लाल तीर उन जगहों को दिखाते हैं जहां ब्लैक होल की केवल अधिकतम सीमा का अनुमान लगाया गया है। हरी रेखा इस पूरे संबंध का औसत रुझान दिखाती है।
वैज्ञानिकों के अनुसार, यह खोज इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि आकाशगंगाएं और ब्लैक होल कैसे विकसित होते हैं। खासकर छोटी आकाशगंगाओं में ब्लैक होल की मौजूदगी अब तक साफ नहीं थी।
यह शोध आने वाले समय की बड़ी दूरबीन परियोजनाओं के लिए भी बेहद उपयोगी साबित होगा, जैसे भारत की प्रस्तावित नेशनल लार्ज ऑप्टिकल टेलीस्कोप (NLOT) और अंतरराष्ट्रीय एक्स्ट्रीमली लार्ज टेलीस्कोप (ELT)। ये दूरबीनें बहुत दूर और हल्की आकाशगंगाओं को भी विस्तार से देखने में सक्षम होंगी।
वैज्ञानिकों का कहना है कि इन नई दूरबीनों की मदद से भविष्य में इस सिद्धांत की और गहराई से जांच की जा सकेगी। इससे यह भी पता लगाया जा सकता है कि क्या छोटी आकाशगंगाओं में शुरुआती (आदिम) ब्लैक होल के बीज मौजूद हैं।
कुल मिलाकर, यह शोध ब्रह्मांड की उत्पत्ति और विकास को समझने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा

