“27 अप्रैल 2026
नगर पालिका परिषद बांकीमोंगरा में “धोखे से हस्ताक्षर कराने” के आरोपों को लेकर सियासत अपने चरम पर पहुंच गई है। इस पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब सत्तापक्ष के कांग्रेसी पार्षदों ने ही अपने नेता प्रतिपक्ष मधुसूदन दास के आरोपों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और सार्वजनिक रूप से उनका खंडन कर दिया।
⚡ आरोप बनाम पलटवार
नेता प्रतिपक्ष मधुसूदन दास ने परिषद पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा था कि—
वार्डों में विकास कार्यों में भेदभाव किया जा रहा है
पार्षद निधि रोकी जा रही है
टेंडर प्रक्रिया में अनियमितता और बंदरबांट हो रही है
इन आरोपों के बाद परिषद की राजनीति में हलचल तेज हो गई।
लेकिन अब उनके के दल के समर्थित पार्षदों ने एकजुट होकर इन आरोपों को “पूरी तरह निराधार और भ्रामक” करार दिया है।
茶 “हमें गुमराह कर लिए गए हस्ताक्षर”
जारी खंडन पत्र में विपक्षी पार्षदों ने चौंकाने वाला दावा किया कि—
उनसे “गुमराह कर” एक पत्र पर हस्ताक्षर कराए गए, जिसका इस्तेमाल अब आरोपों को हवा देने के लिए किया जा रहा है।
विपक्षी पार्षदों ने स्पष्ट किया कि वे ऐसे किसी भी पत्र या आरोप से खुद को पूरी तरह अलग करते हैं।
️ विकास कार्यों पर सफाई
अनेक विपक्षी और सत्ता पक्ष के पार्षदों ने विकास कार्यों को लेकर भी नेता प्रतिपक्ष मधुसुदन के आरोपों को खारिज करते हुए कहा—
सभी 30 वार्डों में निधि का आवंटन नियमों के अनुसार और समय पर हो रहा है
टेंडर प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन और पारदर्शी है
किसी भी प्रकार के पक्षपात या अनियमितता की कोई गुंजाइश नहीं है
उन्होंने यह भी जोड़ा कि नवगठित परिषद होने और सीमित संसाधनों के बावजूद विकास कार्य लगातार जारी हैं।
खंडन करने वाले पार्षद
श्रीमती रूबी गुप्ता – वार्ड 17
श्रीमती राजकुमारी – वार्ड 02
राकेश कुमार अग्रवाल – वार्ड 04
हेमंत कुमार – वार्ड 11
इंद्रजीत कंवर – वार्ड 01
फणीधर कर्ष– वार्ड 05
मामला पहुंचा बड़े नेताओं तक
इस पूरे विवाद की प्रतिलिपि प्रदेश और जिले के बड़े नेताओं व प्रशासनिक अधिकारियों को भी भेजी गई है, जिनमें शामिल हैं—
अरुण साव – नगरीय प्रशासन मंत्री
ज्योत्सना चरणदास – सांसद, कोरबा
चरणदास महंत – नेता प्रतिपक्ष, विधानसभा
जिलाधीश एवं पुलिस अधीक्षक, कोरबा
प्रमोद चौहान – जिला अध्यक्ष, कांग्रेस
吝 निष्कर्ष: “राजनीति बनाम विकास”
बांकीमोंगरा का यह विवाद अब सिर्फ हस्ताक्षर या आरोपों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह आंतरिक राजनीति बनाम विकास कार्य की लड़ाई बनता जा रहा है।
जहां एक ओर विपक्ष सवाल उठा रहा है, वहीं दूसरी ओर खुद पार्टी के पार्षदों का अपने ही नेता के खिलाफ खुलकर सामने आना इस मामले को और ज्यादा पेचीदा बना रहा है।
अब देखना होगा कि प्रशासन इस पूरे विवाद में क्या रुख अपनाता है और क्या यह सियासी टकराव विकास कार्यों की गति को प्रभावित करेगा या नहीं।


