बांकीमोंगरा 29.0426
नगर पालिका परिषद बांकीमोंगरा में सियासी टकराव अब खुलकर सामने आ गया है। विकास कार्यों को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है, जहां एक ओर विपक्ष भ्रष्टाचार और अपारदर्शिता के सवाल उठा रहा है, वहीं सत्ता पक्ष इसे “भ्रम फैलाने की राजनीति” करार दे रहा है।
पी.आई.सी. सदस्य एवं पार्षद प्रमोद सोना ने कांग्रेसी पार्षद मधुसूदन दास पर सीधा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि वे जानबूझकर गलत जानकारी फैलाकर न सिर्फ अन्य पार्षदों को गुमराह कर रहे हैं, बल्कि नगर पालिका की छवि को भी धूमिल करने का प्रयास कर रहे हैं।
“सभी कार्य नियमों के तहत, पारदर्शिता से हो रहे” — प्रमोद सोना
संयुक्त संचालक, नगरीय निकाय विभाग बिलासपुर को लिखे पत्र में प्रमोद सोना ने स्पष्ट किया कि नगर पालिका में होने वाले सभी विकास कार्य और टेंडर प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन और शासन के निर्धारित नियमों के अनुसार पारदर्शी तरीके से संपन्न हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि बिना ठोस प्रमाण के लगाए जा रहे आरोप केवल राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास हैं।
“14 करोड़ के विकास कार्य” फिर भी उठ रहे सवाल
सत्ता पक्ष के अनुसार, नगर पालिका गठन के एक वर्ष के भीतर लगभग 14 करोड़ रुपये के विकास कार्यों को स्वीकृति दी जा चुकी है। सड़क, नाली, पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाओं पर तेजी से काम जारी है।
इसके बावजूद विपक्ष द्वारा उठाए जा रहे सवालों ने आम जनता के बीच भी संशय की स्थिति पैदा कर दी है—क्या यह केवल राजनीति है या वास्तव में कहीं पारदर्शिता पर प्रश्नचिन्ह है?
पुराना विवाद फिर बना मुद्दा
प्रमोद सोना ने यह भी याद दिलाया कि पूर्व में कुछ विपक्षी पार्षदों पर नगर पालिका के अधिकारियों और कर्मचारियों के साथ धक्का-मुक्की करने का आरोप लगा था, जिस पर थाना बांकीमोंगरा में एफआईआर दर्ज हुई थी।
सत्ता पक्ष का कहना है कि उस मामले में सख्त कार्रवाई न होने से कुछ तत्वों के हौसले बढ़े हैं, जो अब विकास कार्यों में व्यवधान उत्पन्न कर रहे हैं।
“विकास को प्राथमिकता दें” — पार्षदों की अपील
प्रमोद सोना के साथ पार्षद रम्भा बाई, लोकनाथ सिंह तंवर, प्रमिला सायतोड़े, इन्द्रदीप कंवर और दिव्या ने उच्चाधिकारियों से अपील की है कि वे राजनीतिक विवादों से ऊपर उठकर केवल विकास कार्यों पर ध्यान केंद्रित करें।
जनता की आवाज: “हमें काम चाहिए, विवाद नहीं”
इस सियासी खींचतान के बीच आम जनता सबसे ज्यादा प्रभावित होती दिख रही है। स्थानीय लोगों का साफ कहना है कि उन्हें आरोप-प्रत्यारोप नहीं, बल्कि सड़क, पानी, बिजली और स्वच्छता जैसी बुनियादी सुविधाएं चाहिए।
लोगों का कहना है—
“नेताओं की लड़ाई में हमारा विकास नहीं रुकना चाहिए।”
निष्कर्ष: भरोसे की कसौटी पर राजनीति
बांकीमोंगरा का यह विवाद अब सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह जनता के भरोसे और क्षेत्र के भविष्य से जुड़ गया है।
अगर सियासत हावी रही, तो विकास की रफ्तार पर असर पड़ना तय है—और इसका सीधा नुकसान आम नागरिकों को उठाना पड़ेगा।



