Tuesday, July 28, 2026
HomeNational11 जुलाई को भारतीय नौसेना में शामिल होगी स्वदेशी स्टील्थ फ्रिगेट ‘महेंद्रगिरि’,...

11 जुलाई को भारतीय नौसेना में शामिल होगी स्वदेशी स्टील्थ फ्रिगेट ‘महेंद्रगिरि’, समुद्री शक्ति को मिलेगा नया आयाम

नई दिल्ली/विशाखापत्तनम, 6 जुलाई 2026। भारतीय नौसेना 11 जुलाई 2026 को विशाखापत्तनम में प्रोजेक्ट 17ए के तहत निर्मित अपनी छठी स्वदेशी स्टील्थ फ्रिगेट ‘महेंद्रगिरि’ (एफ-38) को औपचारिक रूप से नौसेना में शामिल (कमीशन) करने जा रही है। अत्याधुनिक तकनीकों से लैस यह युद्धपोत भारत की स्वदेशी रक्षा निर्माण क्षमता, आत्मनिर्भरता और समुद्री सुरक्षा को नई मजबूती प्रदान करेगा।

‘महेंद्रगिरि’ का नाम पूर्वी घाट की प्रसिद्ध महेंद्रगिरि पर्वत श्रृंखला के नाम पर रखा गया है। यह भारतीय नौसेना का पहला युद्धपोत है, जिसे यह नाम दिया गया है। इस युद्धपोत का डिजाइन भारतीय नौसेना के वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो (WDB) ने तैयार किया है, जबकि इसका निर्माण मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) ने किया है।

यह स्टील्थ फ्रिगेट आधुनिक रडार-रोधी तकनीक, उच्च स्तर के ऑटोमेशन और बेहतर सर्वाइवल क्षमता से लैस है। इसमें अत्याधुनिक कंबाइंड डीजल या गैस (CODOG) प्रोपल्शन सिस्टम लगाया गया है, जिससे यह लंबी समुद्री तैनाती के दौरान अधिक गति और उत्कृष्ट परिचालन क्षमता बनाए रखने में सक्षम है।

महेंद्रगिरि में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है, जो केंद्र सरकार की ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल को मजबूत करता है। इसके निर्माण में देशभर के अनेक उद्योगों, विशेषकर सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) की महत्वपूर्ण भागीदारी रही है, जिससे रक्षा क्षेत्र में रोजगार और औद्योगिक विकास को भी बढ़ावा मिला है।

यह युद्धपोत स्वदेशी अत्याधुनिक हथियारों और सेंसरों से सुसज्जित है। इसमें सतह से सतह तथा सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणालियां, उन्नत इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम, एंटी-सबमरीन वॉरफेयर क्षमता और इंटीग्रेटेड कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम शामिल हैं। इसके अलावा यह एंटी-एयर, एंटी-सरफेस और एंटी-सबमरीन अभियानों के साथ-साथ समुद्री सुरक्षा, मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR), खोज एवं बचाव (SAR) तथा लंबी अवधि के समुद्री मिशनों को प्रभावी ढंग से अंजाम देने में सक्षम है।

भारतीय नौसेना के अनुसार, महेंद्रगिरि का कमीशन होना प्रोजेक्ट 17ए की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इसके बेड़े में शामिल होने से भारतीय नौसेना की युद्ध क्षमता और देश की स्वदेशी युद्धपोत निर्माण क्षमता दोनों को नई मजबूती मिलेगी। साथ ही, यह भारत को विश्व के अग्रणी स्वदेशी युद्धपोत निर्माण करने वाले देशों की श्रेणी में और सशक्त बनाएगा।

हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की सुरक्षा साझेदार की भूमिका को मजबूत करने में भी महेंद्रगिरि महत्वपूर्ण योगदान देगा। यह युद्धपोत देश के समुद्री हितों की रक्षा के साथ सुरक्षित, स्थिर और समृद्ध हिंद-प्रशांत क्षेत्र के निर्माण में अहम भूमिका निभाएगा। अपने आदर्श वाक्य “माइटी–मैजेस्टिक–मैचलेस” के अनुरूप महेंद्रगिरि भारतीय नौसेना की नई ताकत बनकर देश की सेवा के लिए पूरी तरह तैयार है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -spot_img

Most Popular

Recent Comments