
प्रदेश में 1 जून से अब तक 485.9 मिमी औसत वर्षा दर्ज, सामान्य का 94.2 प्रतिशत; प्रशासन ने बाढ़ को लेकर बढ़ाई सतर्कता
रायपुर, 29 जुलाई 2026।
छत्तीसगढ़ में इस वर्ष मानसून का स्वरूप अलग-अलग क्षेत्रों में भिन्न दिखाई दे रहा है। जहां मध्य और मैदानी जिलों में लगातार हो रही तेज बारिश से नदी-नाले उफान पर हैं, जलाशयों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है और किसानों को धान रोपाई में राहत मिली है, वहीं बस्तर संभाग के कई जिलों में अब भी सामान्य से काफी कम वर्षा होने के कारण खेती और जल उपलब्धता को लेकर चिंता बनी हुई है।
राज्य शासन के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा 29 जुलाई 2026 तक जारी आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में 1 जून से अब तक औसतन 485.9 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है, जो पिछले 10 वर्षों की औसत वर्षा 515.9 मिलीमीटर का 94.2 प्रतिशत है। केवल 29 जुलाई को ही प्रदेशभर में औसतन 38.8 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई, जिससे खरीफ फसलों विशेषकर धान की रोपाई के कार्यों में तेजी आई है।
सारंगढ़-बिलाईगढ़ सबसे आगे, कई जिलों में सामान्य से कहीं अधिक वर्षा
इस मानसूनी सीजन में सारंगढ़-बिलाईगढ़ प्रदेश का सर्वाधिक वर्षा वाला जिला बनकर उभरा है। यहां अब तक 772.0 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है, जो सामान्य का 195.5 प्रतिशत है।
इसके अलावा महासमुंद में 698.3 मिमी (147.5%), रायपुर में 579.4 मिमी (132.0%), जांजगीर-चांपा में 708.2 मिमी (131.6%), बलरामपुर में 471.4 मिमी (130.1%), बलौदाबाजार में 607.7 मिमी (125.0%), गरियाबंद में 625.2 मिमी (121.8%), सक्ती में 550.2 मिमी (117.2%), दुर्ग में 462.4 मिमी (114.1%), बिलासपुर में 556.8 मिमी (110.5%), धमतरी में 558.9 मिमी (106.8%), बालोद में 562.1 मिमी (106.4%), कोरिया में 457.1 मिमी (101.7%) तथा मुंगेली में 488.2 मिमी वर्षा दर्ज की जा चुकी है।
लगातार हो रही अच्छी बारिश से इन जिलों में जलाशयों का जलस्तर बढ़ा है और किसानों को खरीफ फसलों के लिए पर्याप्त नमी मिल रही है।
कोरबा सहित कई जिले सामान्य वर्षा की श्रेणी में
प्रदेश के कई जिले सामान्य वर्षा की श्रेणी (80 से 100 प्रतिशत) में शामिल हैं। इनमें कोरबा में अब तक 540.0 मिमी (98.6%), मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर में 426.8 मिमी (99.3%), सूरजपुर में 484.0 मिमी (98.3%), रायगढ़ में 517.8 मिमी (98.1%), राजनांदगांव में 442.3 मिमी (96.0%), गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही में 461.3 मिमी, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई में 346.4 मिमी (91.3%), दंतेवाड़ा में 552.9 मिमी (84.1%), कबीरधाम में 322.5 मिमी (82.9%) तथा नारायणपुर में 499.3 मिमी (80.2%) वर्षा दर्ज की गई है।
बस्तर संभाग के कई जिलों में अब भी बारिश की कमी
मानसून की सबसे कमजोर स्थिति बस्तर संभाग और कुछ अन्य जिलों में देखने को मिल रही है। बीजापुर में अब तक केवल 484.3 मिमी (51.3%) वर्षा हुई है, जो प्रदेश में सबसे कम है।
इसके अलावा सुकमा में 395.0 मिमी (54.5%), मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी में 356.0 मिमी (57.3%), बस्तर (जगदलपुर) में 365.9 मिमी (58.4%), कांकेर में 407.8 मिमी (62.5%), कोंडागांव में 377.4 मिमी (63.3%), सरगुजा में 267.1 मिमी (70.9%), जशपुर में 381.6 मिमी (74.4%) तथा बेमेतरा में 308.4 मिमी (77.5%) वर्षा दर्ज की गई है।
इन जिलों में सामान्य से कम वर्षा के कारण खेती, भूजल स्तर और जल स्रोतों पर असर पड़ने की आशंका बनी हुई है।
24 घंटे में महासमुंद में सबसे अधिक बारिश
बीते 24 घंटों के दौरान महासमुंद में सबसे अधिक 101.5 मिमी वर्षा दर्ज की गई। इसके बाद गरियाबंद में 92.5 मिमी, धमतरी में 90.8 मिमी, रायपुर में 79.7 मिमी, बीजापुर में 74.0 मिमी तथा बालोद में 69.1 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई।
प्रशासन अलर्ट मोड पर
लगातार हो रही बारिश और कई क्षेत्रों में बाढ़ जैसी परिस्थितियों की आशंका को देखते हुए राज्य बाढ़ नियंत्रण कक्ष ने सभी जिला कलेक्टरों एवं आपदा प्रबंधन टीमों को 24 घंटे सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। निचले इलाकों, नदी तटीय क्षेत्रों और संभावित जलभराव वाले स्थानों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है, ताकि किसी भी आपात स्थिति से समय रहते निपटा जा सके।
प्रदेश में मानसून की यह असमान स्थिति प्रशासन और किसानों दोनों के लिए चुनौती और राहत का मिश्रित चित्र प्रस्तुत कर रही है। जहां एक ओर मध्य छत्तीसगढ़ में भरपूर बारिश से खेती को संबल मिला है, वहीं बस्तर और कुछ अन्य क्षेत्रों में अभी भी अच्छी वर्षा का इंतजार बना हुआ है। आने वाले दिनों में मानसून की गतिविधियां इन क्षेत्रों की कृषि और जल संसाधनों की स्थिति तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

