



नई दिल्ली, 14 अगस्त 2026। स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्र के नाम संबोधन में राष्ट्रपति ने विकसित भारत के निर्माण के लिए युवाओं, वरिष्ठ नागरिकों, राष्ट्रीय सुरक्षा, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक सहभागिता को महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने कहा कि सभी भारतवासियों का विकास और कल्याण ही विकसित भारत के निर्माण का वास्तविक लक्ष्य है।
राष्ट्रपति ने कहा कि खेलकूद को युवाओं के विकास और राष्ट्र-निर्माण के माध्यम के रूप में अपनाया जा रहा है। खेलो इंडिया कार्यक्रम के माध्यम से स्थानीय स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक देश के सभी क्षेत्रों के लिए खेलों का बेहतर वातावरण तैयार किया जा रहा है। खेलों को बढ़ावा देने के लिए सरकार अभूतपूर्व निवेश कर रही है और इसके सकारात्मक परिणाम अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारतीय खिलाड़ियों की उपलब्धियों के रूप में सामने आ रहे हैं।
उन्होंने कहा कि भारत में दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी के साथ वरिष्ठ नागरिकों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। वरिष्ठ नागरिकों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए सरकार ने अनेक कदम उठाए हैं। 70 वर्ष और उससे अधिक आयु के लगभग 6 करोड़ वरिष्ठ नागरिकों के लिए प्रति वर्ष 5 लाख रुपये तक की निशुल्क स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराई जा रही है। राष्ट्रपति ने समाज से वरिष्ठ नागरिकों के प्रति संवेदनशील रहने तथा उनके आत्मसम्मान और सम्मान को बनाए रखने का आह्वान किया।
आतंकवाद के खिलाफ भारत का दृढ़ संकल्प
राष्ट्रपति ने कारगिल विजय दिवस और ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए भारतीय सेनाओं के शौर्य और पराक्रम को नमन किया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के विरुद्ध ऑपरेशन सिंदूर भारतीय सेनाओं की अचूक क्षमता का प्रमाण है। आतंकवादियों और उनके समर्थकों को स्पष्ट संदेश दिया गया है कि वे कहीं भी छिपें, उन्हें अपने कृत्यों की सजा भुगतनी होगी।
उन्होंने आतंकवाद को संरक्षण देने वाले देश के साथ सिंधु जल संधि को निलंबित करने के निर्णय को देश, विशेषकर किसानों के हित में निर्णायक कदम बताया।
नक्सलवाद से मुक्त भारत की उपलब्धि
राष्ट्रपति ने कहा कि दशकों तक नक्सलवाद देश के सामने गंभीर चुनौती बना रहा, लेकिन भारत को नक्सलवाद से मुक्त करने की दिशा में मिली सफलता एक बड़ी उपलब्धि है। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में अब विकास और उत्साह का वातावरण बन रहा है। उन्होंने बस्तर ओलिंपिक्स और बस्तर पंडुम जैसे आयोजनों में बड़ी संख्या में खिलाड़ियों, कलाकारों और दर्शकों की भागीदारी का उल्लेख करते हुए इसे बदलते भारत की तस्वीर बताया।
भारतीय विरासत को वैश्विक सम्मान
राष्ट्रपति ने भारत की समृद्ध सांस्कृतिक और सैन्य विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि राष्ट्र-गौरव की रक्षा से जुड़ी मराठा सैन्य परंपरा के 12 दुर्गों को पिछले वर्ष UNESCO की World Heritage List में स्थान मिला। वहीं इस वर्ष भगवान बुद्ध के प्रथम प्रवचन स्थल सारनाथ को भी UNESCO की World Heritage List में शामिल किया गया है।
उन्होंने कहा कि भारतभूमि पर एक ओर भगवान बुद्ध से जुड़े आध्यात्मिक स्मारक हैं, तो दूसरी ओर आत्मसम्मान और गौरवशाली परंपराओं की रक्षा के लिए संघर्ष करने की भारतीय क्षमता के प्रतीक भी मौजूद हैं।
‘देश’ का अर्थ केवल मिट्टी नहीं, देश का अर्थ जनसमुदाय
राष्ट्रपति ने तेलुगू के महान राष्ट्रवादी साहित्यकार गुरजाडा अप्पाराव की पंक्तियों का उल्लेख करते हुए कहा—
“देसमुनु प्रेमिंचुमन्ना, मंचि अन्नदि पेंचुमन्ना।
देसमंटे, मट्टि कादोय, देसमंटे, मनुषुलोय।”
उन्होंने इन पंक्तियों का भाव बताते हुए कहा कि देश से प्रेम करना और भलाई को बढ़ाना ही सच्ची देशभक्ति है। देश केवल मिट्टी का नाम नहीं, बल्कि देश में रहने वाले समस्त जनसमुदाय का नाम है।
राष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त किया कि समाज की भागीदारी और सरकार के प्रयासों से गांव-गांव, नगर-नगर और भारत के घर-घर में रहने वाले सभी लोग स्वस्थ, सुखी और समृद्ध बनेंगे।
उन्होंने देशवासियों से आह्वान किया कि देश प्रेम की सर्वसमावेशी भावना के साथ सभी लोग स्वतंत्र भारत को विकसित भारत बनाने की राष्ट्रीय साधना में स्वयं को समर्पित करें।
जय हिंद!
जय भारत!

