


आउटसोर्सिंग कंपनियों में भू-विस्थापितों और स्थानीय बेरोजगारों को प्राथमिकता देने की मांग, महाप्रबंधक और कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन
कोरबा/कुसमुंडा। एसईसीएल की कुसमुंडा खदान में आउटसोर्सिंग कंपनियों के माध्यम से होने वाले कार्यों में भू-विस्थापित परिवारों और स्थानीय बेरोजगारों को रोजगार देने की मांग को लेकर छत्तीसगढ़ किसान सभा ने सोमवार को प्रदर्शन किया। किसान सभा के नेतृत्व में कुसमुंडा से बाइक रैली निकालकर कार्यकर्ता कलेक्ट्रेट पहुंचे। इसके बाद कोसाबाड़ी चौक पर प्रदर्शन कर कलेक्टर, कोरबा एवं एसईसीएल कुसमुंडा क्षेत्र के महाप्रबंधक के नाम ज्ञापन सौंपा गया।
किसान सभा ने मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं होने की स्थिति में 4 नवंबर 2026 को कुसमुंडा खदान बंद कराने और कोयला परिवहन पूरी तरह रोकने की चेतावनी दी है। आंदोलन को भू-विस्थापित रोजगार एकता संघ ने भी समर्थन दिया है।
30 प्रतिशत रोजगार के नाम पर अधिकार छीने जाने का आरोप
छत्तीसगढ़ किसान सभा ने आरोप लगाया कि एसईसीएल के लिए जमीन अधिग्रहण के बाद अनेक भू-विस्थापित परिवार रोजगार के लिए भटक रहे हैं। संगठन का कहना है कि जमीन अधिग्रहण के दौरान बनाए गए नियमों के कारण कई छोटे किसान रोजगार से वंचित रह जाते हैं। वहीं, आउटसोर्सिंग कंपनियों में भी स्थानीय प्रभावितों को पर्याप्त अवसर नहीं मिल रहा है।
किसान सभा के प्रदेश अध्यक्ष प्रशांत झा ने कहा कि एसईसीएल में जमीन अधिग्रहण के बाद हजारों भू-विस्थापित रोजगार की तलाश में हैं। उनके अनुसार, कुसमुंडा और गेवरा क्षेत्र में होने वाले कार्यों में प्रभावित परिवारों को प्राथमिकता नहीं दी जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि आउटसोर्सिंग कंपनियों में रोजगार देने की व्यवस्था में अनियमितताएं हो रही हैं, जिससे स्थानीय बेरोजगारों के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं।
प्रशांत झा ने कहा कि रोजगार की मांग को लेकर आंदोलन की शुरुआत कुसमुंडा से की गई है। यदि मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई नहीं होती है, तो 4 नवंबर को कुसमुंडा खदान बंद कराने के साथ कोयला परिवहन रोकने के लिए आंदोलन किया जाएगा।
जमीन अधिग्रहण के बाद भी रोजगार से वंचित हैं प्रभावित परिवार: किसान सभा
किसान सभा के जिला अध्यक्ष जय कौशिक और जिला सचिव दीपक साहू ने कहा कि खदान विस्तार के लिए ग्रामीणों की जमीन अधिग्रहित की जाती है, लेकिन रोजगार देने के समय प्रभावित परिवारों को कथित तौर पर 100 प्रतिशत अवसर नहीं मिल पाता। उन्होंने 70 और 30 प्रतिशत के आधार पर रोजगार देने की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि प्रभावित ग्रामीणों के अधिकारों की रक्षा की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि विकास के नाम पर गांव और जमीन से विस्थापित हुए परिवारों के जीवन स्तर में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है। अनेक छोटे किसान खेती-किसानी से अलग होने के बाद भी रोजगार से वंचित हैं। संगठन के अनुसार, लगातार संघर्ष के बावजूद कुछ लोगों को ही वैकल्पिक रोजगार मिल पा रहा है। किसान सभा ने प्रभावितों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है।
भू-विस्थापित रोजगार एकता संघ ने भी दिया समर्थन
भू-विस्थापित रोजगार एकता संघ के रेशम यादव और दामोदर श्याम ने कहा कि जिन परिवारों की जमीन अधिग्रहित हुई है, उन्हें स्थायी रोजगार नहीं मिल रहा है। साथ ही, उनके परिवारों के सदस्यों को आउटसोर्सिंग कंपनियों में भी पर्याप्त अवसर नहीं मिल रहे हैं।
उन्होंने कहा कि इन्हीं समस्याओं को लेकर एसईसीएल कुसमुंडा क्षेत्र के महाप्रबंधक कार्यालय और कलेक्ट्रेट के समक्ष प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंपा गया है। मांगों का जल्द समाधान नहीं होने पर आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी दी गई।
किसान सभा की प्रमुख मांगें
- भू-विस्थापितों को प्राथमिकता: खदान विस्तार के लिए पूर्व में और वर्तमान में जिन गांवों की जमीन अधिग्रहित की गई है, वहां के बेरोजगारों को आउटसोर्सिंग कंपनियों में प्राथमिकता के आधार पर वैकल्पिक रोजगार दिया जाए।
- स्थानीय बेरोजगारों को अवसर: खनन प्रभावित क्षेत्र और कोरबा जिले के बेरोजगारों को आउटसोर्सिंग कंपनियों में रोजगार उपलब्ध कराया जाए।
- पुराने कर्मचारियों को दोबारा काम: किसी आउटसोर्सिंग कंपनी का काम समाप्त होने के बाद नई कंपनी में पुराने कर्मचारियों को पुनः काम पर रखा जाए। संगठन ने कहा कि गोदावरी कंपनी बंद होने से जिले के सैकड़ों कर्मचारी बेरोजगार हो गए हैं।
- 70-30 प्रतिशत व्यवस्था समाप्त करने की मांग: संगठन ने आउटसोर्सिंग कंपनियों में रोजगार के 70 और 30 प्रतिशत के बंटवारे की व्यवस्था समाप्त कर जमीन अधिग्रहण से प्रभावित परिवारों को प्राथमिकता देने तथा खनन प्रभावित जिले के बेरोजगारों को रोजगार देने की मांग की।
बड़ी संख्या में भू-विस्थापित और ठेका मजदूर रहे उपस्थित
प्रदर्शन में जय कौशिक, दामोदर श्याम, रेशम यादव, उत्तम दास, सम्मेलाल, गणेश बिंझवार, दिलीप कंवर, विकास बिंझवार, आनंद पाल, महेंद्रा, संजय, जीवन सारथी, हरि साहू, हुसैन, राजेश्वर दास, नटवर लाल, मनोज महंत, मनीष, हरिहर साहू, श्याम सुंदर महंत, गुड्डू राठौर, रामकुमार, जयचंद, हेमंत पटेल, शशि यादव, गुरु शरण, मनोज सहित बड़ी संख्या में भू-विस्थापित और ठेका मजदूर मौजूद रहे।
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