
‘सेवा-संकल्प-अभियान’ से राजस्व व्यवस्था में बदलाव, दफ्तरों के चक्कर से मिली राहत
रायपुर, 17 सितंबर 2026। छत्तीसगढ़ सरकार के ‘सेवा के संकल्प’ के तहत राजस्व प्रशासन को डिजिटल बनाने की दिशा में लगातार बड़े कदम उठाए जा रहे हैं। डिजिटल तकनीक के माध्यम से भूमि संबंधी प्रक्रियाओं को आसान, पारदर्शी और तेज बनाने का प्रयास किया गया है।
‘भुईयां’ और ‘भू-नक्शा’ के माध्यम से प्रदेश के 20,298 गांवों के खसरा तथा 19,723 गांवों के भू-नक्शों का कंप्यूटरीकरण पूरा हो चुका है। इससे भूमि संबंधी शुद्ध एवं प्रमाणिक अभिलेख ऑनलाइन उपलब्ध हो रहे हैं।
158 तहसीलों में मॉडर्न रिकॉर्ड रूम
प्रदेश की 158 तहसीलों में मॉडर्न रिकॉर्ड रूम तैयार किए गए हैं। इससे पुराने दस्तावेजों के सुरक्षित रखरखाव में मदद मिलेगी और अभिलेखों के गुम या खराब होने की समस्या कम होगी।
रजिस्ट्री के बाद ऑटो नामांतरण
105 उप-पंजीयक कार्यालयों को भुईयां पोर्टल से जोड़ा गया है। यहां ‘ऑटो नामांतरण’ व्यवस्था लागू की गई है। जमीन की रजिस्ट्री होने के बाद क्रेता के नाम नामांतरण की प्रक्रिया स्वतः शुरू हो जाती है।
ई-कोर्ट से ऑनलाइन मिलेगी केस की जानकारी
भूमि विवादों के निराकरण के लिए ई-कोर्ट व्यवस्था शुरू की गई है। नागरिक घर बैठे ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। केस से जुड़ी जानकारी और पेशी की तारीख SMS के माध्यम से मोबाइल पर प्राप्त की जा सकती है।
15 दिनों में ऑटो व्यपवर्तन
‘ऑटो व्यपवर्तन’ के माध्यम से भूमि उपयोग परिवर्तन की प्रक्रिया 15 दिनों के भीतर पूरी करने की व्यवस्था की गई है। वहीं गाइडलाइन दरों के निर्धारण की प्रक्रिया भी स्वचालित की गई है।
किसानों के लिए डिजिटल ऋण पुस्तिका
पटवारी एवं उप-पंजीयक के डिजिटल हस्ताक्षर वाली ‘डिजिटल किसान ऋण पुस्तिका’ पोर्टल पर स्वतः तैयार हो रही है। इसे भविष्य में सिविल कोर्ट से जोड़ने की योजना है।
व्हाट्सएप चैटबॉट पर मिलेंगे दस्तावेज
आम नागरिकों की सुविधा के लिए खसरा और बी-1 जैसे जरूरी दस्तावेज व्हाट्सएप चैटबॉट के माध्यम से भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इन डिजिटल पहलों से राजस्व सेवाओं में पारदर्शिता और सुशासन को बढ़ावा मिलने की बात कही गई है।
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