


कहीं दुकानों के बीच पर्याप्त दूरी नहीं, कहीं ज्वलनशील कपड़ों से निर्माण; अग्निशामक यंत्र भी महज 6 दुकानों के सामने नजर आए, दमकल और एंबुलेंस की व्यवस्था पर भी सवाल
बांकीमोंगरा। त्योहारी खुशियों के बीच बांकीमोंगरा का पटाखा बाजार लोगों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवालों के घेरे में आ गया है। पटाखों की बिक्री के लिए लगाए गए अस्थायी बाजार में सुरक्षा मानकों की अनदेखी किए जाने के आरोप सामने आए हैं। बाजार में कुल 17 दुकानें संचालित हो रही हैं, लेकिन मौके पर दिखाई दे रही व्यवस्थाएं किसी संभावित दुर्घटना की आशंका को नजरअंदाज नहीं करने देतीं।
स्थानीय स्तर पर सामने आई तस्वीरों और जानकारी के अनुसार, कई दुकानों के निर्माण में कपड़े के पर्दों का इस्तेमाल किया गया है। दुकानों के बीच पर्याप्त दूरी नहीं होने, अग्निशमन उपकरणों की कमी और आपातकालीन सुविधाओं के अभाव को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
दुकानों के बीच दूरी नहीं, आग फैलने का खतरा
पटाखा बिक्री के अस्थायी बाजार में दुकानों के बीच निर्धारित सुरक्षा दूरी बनाए रखना बेहद जरूरी है। लेकिन यहां दुकानें कतारबद्ध और एक-दूसरे के काफी नजदीक बनाई गई दिखाई दे रही हैं। यदि किसी एक दुकान में आग लगती है, तो आसपास की दुकानों तक आग पहुंचने का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में निर्धारित मानकों का पालन हुआ है या नहीं, इसकी जांच जरूरी है।
कपड़े के पर्दों से बनी दुकानें, सुरक्षा इंतजामों पर सवाल
पटाखा बाजार में ज्वलनशील सामग्री का इस्तेमाल चिंता का विषय है। दुकानों में कपड़े के पर्दे और अन्य सामग्री लगाए जाने से अग्नि सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। इसके अलावा दुकानों के प्रवेश द्वारों की बनावट और आसपास की जगह को लेकर भी निरीक्षण की आवश्यकता है।
17 दुकानों में केवल 6 के सामने अग्निशामक यंत्र!
बाजार की सुरक्षा व्यवस्था का एक अहम पहलू अग्निशमन उपकरण हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, कुल 17 दुकानों में से केवल 6 दुकानों के सामने CO2 अग्निशामक यंत्र दिखाई दे रहे हैं। शेष दुकानों में आग पर काबू पाने के लिए क्या व्यवस्था है, यह स्पष्ट नहीं है। पानी और सूखी रेत से भरी बाल्टियों की उपलब्धता भी नजर नहीं आने की बात सामने आई है।
दमकल और एंबुलेंस की मौजूदगी पर सवाल
इतने संवेदनशील बाजार में आपातकालीन व्यवस्था का होना आवश्यक है। किसी अप्रिय घटना की स्थिति में तत्काल दमकल वाहन, एंबुलेंस और प्राथमिक चिकित्सा की सुविधा उपलब्ध होनी चाहिए। लेकिन मौके पर इन व्यवस्थाओं की मौजूदगी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। आखिर आपात स्थिति में राहत और बचाव की जिम्मेदारी कौन संभालेगा?
दुकानों के सामने पटाखों का प्रदर्शन, नियमों की अनदेखी का आरोप
पटाखा बिक्री स्थल पर धूम्रपान, खुली आग और ज्वलनशील गतिविधियों पर प्रतिबंध का पालन जरूरी है। इसके बावजूद दुकानों के सामने ही पटाखे फोड़कर ग्राहकों को सैंपल दिखाए जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। यदि ऐसा हो रहा है तो यह बेहद गंभीर मामला है, जिसकी तत्काल जांच होनी चाहिए।
नाबालिगों से दुकान संचालन कराने का भी आरोप
पटाखा दुकानों में नाबालिग बच्चों को दुकान संभालते देखे जाने की बात भी सामने आई है। विस्फोटक सामग्री के कारोबार में सुरक्षा और जिम्मेदारी सर्वोपरि है। ऐसे में यह जांच का विषय है कि कहीं नाबालिगों को जोखिम भरे कामों में तो नहीं लगाया जा रहा है।
प्रशासन और संबंधित विभागों की निगरानी पर सवाल
सबसे बड़ा सवाल यह है कि 17 दुकानों वाले इस पटाखा बाजार को अनुमति देने से पहले सुरक्षा मानकों का सत्यापन किस स्तर पर किया गया? क्या सभी दुकानों के लाइसेंस, दुकानों के बीच दूरी, अग्निशमन उपकरण और आपातकालीन व्यवस्थाओं की जांच की गई है? क्या संबंधित अधिकारियों ने मौके पर निरीक्षण किया है?
अब कार्रवाई का इंतजार, हादसे के बाद नहीं जागे प्रशासन!
CG NEWS HUB जनहित में जिला प्रशासन, पुलिस विभाग, अग्निशमन विभाग और संबंधित लाइसेंसिंग अधिकारियों का ध्यान इस ओर आकर्षित करता है कि पटाखा बाजार का तत्काल निरीक्षण कराया जाए। सभी दुकानों में निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाए। जहां भी अनियमितता मिले, वहां नियमानुसार कार्रवाई हो और आवश्यक सुरक्षा इंतजाम तत्काल उपलब्ध कराए जाएं।
त्योहार खुशियों और रोशनी का प्रतीक है, न कि किसी परिवार के लिए दुखद घटना की वजह। प्रशासन की जिम्मेदारी है कि नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे।
अब देखना यह होगा कि जिम्मेदार अधिकारी समय रहते सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त कराते हैं या फिर किसी बड़ी अनहोनी के बाद ही कार्रवाई की जाएगी?

