नई दिल्ली 9 अप्रैल 2026।भारत में बढ़ते साइबर धोखाधड़ी और वित्तीय अपराधों पर लगाम लगाने के लिए बड़ा कदम उठाया गया है। वित्तीय खुफिया इकाई (FIU-India) और भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) ने आपसी सहयोग बढ़ाने के लिए एक अहम समझौता (MoU) किया है।इस समझौते पर FIU-India के निदेशक अमित मोहन गोविल और I4C के सीईओ राजेश कुमार ने हस्ताक्षर किए। इसका मुख्य उद्देश्य दोनों एजेंसियों के बीच जानकारी साझा करना और मिलकर साइबर अपराधों पर तेजी से कार्रवाई करना है।क्या होगा फायदा?साइबर ठगी और वित्तीय अपराधों को रोकने में मदद मिलेगीडिजिटल लेनदेन को और सुरक्षित बनाया जाएगाठगी के मामलों में पैसे की वसूली (रिकवरी) आसान होगीजांच एजेंसियों को मजबूत जानकारी और तकनीकी सहयोग मिलेगाक्यों जरूरी है यह कदम?आजकल ऑनलाइन पेमेंट और डिजिटल लेनदेन तेजी से बढ़ रहे हैं। इसके साथ ही साइबर ठगी के मामले भी बढ़े हैं। ऐसे में लोगों की सुरक्षा के लिए मजबूत सिस्टम की जरूरत थी, जिसे यह समझौता पूरा करेगा।कैसे काम करेंगी एजेंसियां?संदिग्ध लेनदेन की जानकारी साझा की जाएगीठगी पकड़ने के नए तरीके और अलर्ट सिस्टम बनाए जाएंगेबैंक और अन्य संस्थानों को चेतावनी और दिशा-निर्देश दिए जाएंगेएजेंसियों के बारे मेंFIU-India एक केंद्रीय एजेंसी है जो संदिग्ध पैसों के लेनदेन पर नजर रखती है और मनी लॉन्ड्रिंग जैसी गतिविधियों को रोकने का काम करती है।वहीं I4C गृह मंत्रालय के तहत काम करता है और साइबर अपराध से निपटने के लिए देशभर की पुलिस और एजेंसियों को जोड़ने का काम करता है। कुल मिलाकर, यह समझौता साइबर अपराध के खिलाफ “एकजुट सरकार” की दिशा में बड़ा और मजबूत कदम माना जा रहा है।


