रायगढ़,8 सितंबर 2026।
लखीराम अग्रवाल स्मृति शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय एवं संबद्ध संत बाबा गुरु घासीदास जी स्मृति चिकित्सालय, रायगढ़ के चिकित्सकों ने एक बेहद जटिल और हाई-रिस्क ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम देकर 46 वर्षीय महिला चंपा यादव की जान बचाई। चिकित्सकों ने महिला के पेट से करीब 8 किलोग्राम वजनी विशालकाय फाइब्रॉएड ट्यूमर निकाला, जिसका आकार लगभग 24.2 × 23.1 × 17 सेंटीमीटर था। ट्यूमर आकार में लगभग एक बड़े फुटबॉल जितना था।


एक महीने से दर्द, सूजन और उल्टी से थी परेशान
झलमला निवासी चंपा यादव पिछले करीब एक महीने से पेट में तेज दर्द, अत्यधिक सूजन और उल्टी की समस्या से परेशान थीं। 22 अगस्त 2026 को उन्हें गंभीर अवस्था में प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग में भर्ती कराया गया। जांच में उनके शरीर में खून की भारी कमी पाई गई और हीमोग्लोबिन स्तर महज 7.5 ग्राम/डेसीलीटर था।
सीटी स्कैन और अल्ट्रासाउंड जांच में पेट में मौजूद विशाल ट्यूमर के कारण गर्भाशय के विस्थापित होने तथा बायीं मूत्रवाहिनी पर दबाव पड़ने की जानकारी सामने आई। इसके चलते किडनी प्रभावित हो रही थी, जबकि लिवर के पैरामीटर भी बिगड़े हुए थे।
पहले मरीज को किया गया ऑपरेशन के लिए तैयार
मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए चिकित्सकों ने तत्काल ऑपरेशन करने के बजाय पहले उन्हें स्थिर करने का निर्णय लिया। खून की कमी दूर करने के लिए कई यूनिट पैक्ड रेड ब्लड सेल (PRBC) चढ़ाए गए। साथ ही एंटीबायोटिक्स और अन्य आवश्यक उपचार के माध्यम से मरीज की स्थिति को सर्जरी के अनुकूल बनाया गया।
मरीज के स्थिर होने के बाद 1 सितंबर 2026 को जनरल एनेस्थीसिया के तहत हाई-रिस्क एक्सप्लोरेटरी लेपरोटॉमी सर्जरी की गई।
आंतों और मूत्रवाहिनियों से जुड़ा था ट्यूमर
ऑपरेशन के दौरान चिकित्सकों के सामने बड़ी चुनौती थी। विशाल ट्यूमर आंतों से बेहद गहराई तक चिपका हुआ था। स्थिति की जटिलता को देखते हुए ऑपरेशन में जनरल सर्जरी विभाग की विशेष सहायता ली गई।
स्त्री रोग, जनरल सर्जरी और निश्चेतना विभाग की संयुक्त टीम ने बेहद सावधानी से आंतों से ट्यूमर के जटिल जुड़ाव को अलग किया। साथ ही दोनों मूत्रवाहिनियों को बिना नुकसान पहुंचाए सुरक्षित रूप से अलग किया गया। इसके बाद गर्भाशय सहित विशाल ट्यूमर को सफलतापूर्वक शरीर से बाहर निकाला गया।
ऑपरेशन के बाद स्थिति स्थिर
कई चुनौतियों के बावजूद यह जटिल ऑपरेशन पूरी तरह सफल रहा। सर्जरी के बाद चंपा यादव को रिकवरी रूम में रखा गया, जहां उन्हें आईवी फ्लूइड्स और दर्द निवारक दवाएं दी जा रही हैं। चिकित्सकों के अनुसार उनकी स्थिति अब स्थिर है और वे स्वास्थ्य लाभ ले रही हैं।
इस सफल ऑपरेशन को रायगढ़ मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों की टीमवर्क, विशेषज्ञता और त्वरित चिकित्सकीय निर्णय क्षमता की महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

