रायपुर, 14 जुलाई 2026। मानसून की बारिश जहां भीषण गर्मी से राहत लेकर आती है, वहीं वातावरण में बढ़ी नमी और उमस संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा भी कई गुना बढ़ा देती है। इस मौसम में बैक्टीरिया, वायरस और फफूंद तेजी से पनपते हैं, जिससे भोजन और पेय पदार्थ आसानी से दूषित हो जाते हैं। परिणामस्वरूप दस्त, फूड पॉइजनिंग, टाइफाइड, वायरल बुखार, सर्दी-जुकाम और अन्य संक्रमणों के मामले बढ़ने लगते हैं। ऐसे में स्वास्थ्य विशेषज्ञ लोगों को खानपान और व्यक्तिगत स्वच्छता को लेकर विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दे रहे हैं।
कृषि विज्ञान केन्द्र, रायगढ़ की आहार एवं पोषण विशेषज्ञ डॉ. मनीषा चौधरी ने बताया कि वर्षा ऋतु में रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाए रखने के लिए ताजा, पौष्टिक, सुपाच्य और स्वच्छ भोजन का सेवन सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि इस मौसम में खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थ, बासी भोजन, कटे हुए फल, खुले जूस, चाट, गोलगप्पे और अन्य स्ट्रीट फूड से बचना चाहिए, क्योंकि इनमें संक्रमण फैलने की संभावना अधिक रहती है।
उन्होंने सलाह दी कि पीने के लिए हमेशा उबला हुआ या फिल्टर किया गया स्वच्छ पानी ही इस्तेमाल करें तथा घर में बना ताजा और अच्छी तरह पका भोजन ही खाएं। भोजन को हमेशा ढककर रखें और फल-सब्जियों को अच्छी तरह धोने के बाद ही उपयोग करें। कच्चे और पके खाद्य पदार्थों को अलग-अलग रखने से भी संक्रमण का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है।
रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थों को दें प्राथमिकता
डॉ. चौधरी के अनुसार मानसून के दौरान दालें, अंकुरित अनाज, हरी पत्तेदार सब्जियां और विटामिन-सी से भरपूर फल जैसे आंवला, अमरूद और संतरा नियमित आहार का हिस्सा बनने चाहिए। इसके अलावा करेला, मेथी, हल्दी, तुलसी और नीम जैसे प्राकृतिक खाद्य पदार्थ भी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक होते हैं।
उन्होंने कहा कि पर्याप्त मात्रा में स्वच्छ पानी पीते रहें और ग्रीन टी, हर्बल टी, गर्म सूप, खिचड़ी, दलिया तथा भुट्टे जैसे हल्के एवं सुपाच्य खाद्य पदार्थों को प्राथमिकता दें। ये खाद्य पदार्थ पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने के साथ शरीर को आवश्यक पोषण भी प्रदान करते हैं।
रसोई की सफाई और व्यक्तिगत स्वच्छता भी जरूरी
विशेषज्ञ ने बताया कि मानसून में रसोई और खाद्य पदार्थ रखने वाले स्थान की नियमित सफाई बेहद आवश्यक है। फ्रिज में रखे भोजन को दोबारा खाने से पहले अच्छी तरह गर्म करना चाहिए। बारिश में भीगने के बाद तुरंत सूखे और साफ कपड़े पहनने चाहिए, ताकि फंगल संक्रमण से बचा जा सके।
उन्होंने कहा कि बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों को इस मौसम में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि इन वर्गों में संक्रमण का खतरा अपेक्षाकृत अधिक रहता है।
मच्छरों से बचाव भी उतना ही जरूरी
डॉ. चौधरी ने लोगों से घर और आसपास पानी जमा नहीं होने देने की अपील की। उन्होंने कहा कि रुके हुए पानी में मच्छरों का प्रजनन तेजी से होता है, जिससे डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए नियमित सफाई, पानी की निकासी और मच्छररोधी उपाय अपनाना आवश्यक है।
लक्षण दिखें तो तुरंत लें चिकित्सकीय सलाह
विशेषज्ञ ने बताया कि यदि लगातार बुखार, उल्टी, दस्त, कमजोरी या शरीर में पानी की कमी जैसे लक्षण दिखाई दें तो बिना देरी किए चिकित्सक से संपर्क करें। स्वयं दवा लेने की बजाय डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही उपचार कराना चाहिए।
उन्होंने कहा कि मानसून का मौसम प्राकृतिक सौंदर्य और ठंडक लेकर आता है, लेकिन थोड़ी-सी लापरवाही स्वास्थ्य पर भारी पड़ सकती है। स्वच्छ भोजन, सुरक्षित पेयजल, संतुलित आहार, नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और व्यक्तिगत स्वच्छता अपनाकर मौसमी संक्रमणों से प्रभावी रूप से बचा जा सकता है।
मुख्य बातें
ताजा और घर का बना भोजन करें।
उबला या फिल्टर किया हुआ पानी ही पिएं।
बासी और खुले खाद्य पदार्थों से बचें।
फल-सब्जियों को अच्छी तरह धोकर उपयोग करें।
घर के आसपास पानी जमा न होने दें।
बुखार, दस्त या उल्टी होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।


