नई दिल्ली/चांदीपुर।
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और भारतीय वायु सेना (आईएएफ) ने स्वदेशी रूप से विकसित रुद्रम-II वायु-से-सतह मिसाइल का हवाई प्लेटफॉर्म से सफल उड़ान परीक्षण कर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। अत्यंत चुनौतीपूर्ण परिचालन परिस्थितियों और महत्वपूर्ण प्रक्षेप पथ पर किए गए इन परीक्षणों ने मिसाइल की सटीकता, विश्वसनीयता तथा इसकी सभी प्रमुख उपप्रणालियों के उत्कृष्ट प्रदर्शन को प्रमाणित किया।
परीक्षण के दौरान प्रक्षेपित की गई सभी मिसाइलों ने अपने पूर्वनिर्धारित लक्ष्यों पर अत्यंत सटीकता के साथ प्रहार किया। चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज (आईटीआर) द्वारा तैनात उन्नत ट्रैकिंग एवं रेंज उपकरणों से प्राप्त उड़ान आंकड़ों ने पुष्टि की कि परीक्षण के सभी निर्धारित उद्देश्य पूर्ण रूप से सफल रहे।
रुद्रम-II मिसाइल का विकास डीआरडीओ की हैदराबाद स्थित नोडल प्रयोगशाला इमारत अनुसंधान केंद्र (आरसीआई) द्वारा किया गया है। इस परियोजना में रक्षा अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशाला, उच्च ऊर्जा सामग्री अनुसंधान प्रयोगशाला, शस्त्र अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान तथा आईटीआर सहित कई सहयोगी प्रयोगशालाओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके अलावा विकास-सह-उत्पादन साझेदारों, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल), क्षेत्रीय सैन्य विमानन योग्यता केंद्र, मिसाइल प्रणाली गुणवत्ता आश्वासन एजेंसी तथा विभिन्न उद्योगों का भी उल्लेखनीय योगदान रहा।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रुद्रम-II के सफल परीक्षणों पर डीआरडीओ, भारतीय वायु सेना, रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों तथा उद्योग जगत के सभी सहयोगियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह सफलता भारत की स्वदेशी रक्षा प्रौद्योगिकियों की बढ़ती परिपक्वता, विश्वसनीयता और क्षमता का प्रमाण है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह उपलब्धि उन्नत हथियार प्रणालियों के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को और मजबूत करेगी तथा देश की रक्षा तैयारियों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव तथा डीआरडीओ के अध्यक्ष ने भी इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर परीक्षण से जुड़ी सभी वैज्ञानिक, तकनीकी और परिचालन टीमों को बधाई देते हुए उनके योगदान की सराहना की।


