नई दिल्ली । सोलर ऊर्जा अपनाने वाले उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत की खबर है। केंद्र सरकार ने डीसीआर (Domestic Content Requirement) मॉड्यूल की अनिवार्यता को 31 दिसंबर 2026 तक छह महीने के लिए स्थगित कर दिया है। अब इस अवधि तक नेट मीटरिंग और ओपन एक्सेस सोलर परियोजनाओं में नॉन-डीसीआर (Non-DCR) मॉड्यूल का भी उपयोग किया जा सकेगा।
सरकार के इस फैसले से सोलर सिस्टम की लागत में प्रति किलोवाट लगभग 12 हजार रुपये तक की कमी आने की संभावना है। पहले डीसीआर मॉड्यूल की अनिवार्यता के कारण मॉड्यूल की कीमतें लगभग दोगुनी हो गई थीं। जहां पहले नॉन-डीसीआर मॉड्यूल 15–16 रुपये प्रति वाट उपलब्ध थे, वहीं डीसीआर मॉड्यूल की कीमत 30–32 रुपये प्रति वाट तक पहुंच गई थी। इसका सीधा असर प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना सहित घरेलू और व्यावसायिक सोलर परियोजनाओं पर पड़ा था।
हजारों परियोजनाएं हुई थीं प्रभावित
1 जून 2026 से लागू ALMM (Approved List of Models and Manufacturers) नियम के तहत केवल डीसीआर मॉड्यूल वाले सोलर प्रोजेक्ट्स को ही ग्रिड कनेक्शन दिया जा रहा था। इसके चलते देशभर में हजारों रूफटॉप और ओपन एक्सेस सोलर परियोजनाएं बीच में ही अटक गई थीं। कई स्थानों पर सोलर पैनल लगाने के लिए ढांचे तैयार हो चुके थे, लेकिन मॉड्यूल उपलब्ध नहीं होने से काम पूरा नहीं हो सका।
वेंडर्स और उपभोक्ताओं को मिलेगी राहत
राजस्थान सहित कई राज्यों में 2,200 से अधिक सोलर वेंडर्स प्रभावित हुए थे। मॉड्यूल की कमी से ग्राहकों और वेंडर्स के बीच विवाद की स्थिति बन रही थी। सरकार के नए निर्णय से पहले से रुकी परियोजनाएं पूरी हो सकेंगी और उपभोक्ताओं को भी कम लागत में सोलर सिस्टम लगाने का लाभ मिलेगा।
स्थायी समाधान की मांग
सोलर उद्योग से जुड़े संगठनों का कहना है कि छह महीने की राहत से तत्काल समस्या तो दूर होगी, लेकिन देश में सोलर सेल के घरेलू उत्पादन को बढ़ाने और उद्योग के लिए दीर्घकालिक एवं व्यावहारिक नीति बनाने की आवश्यकता है, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने।


