Monday, September 21, 2026
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वीबी-जीरामजी में अब 375 प्रकार के अनुमेय कार्य, गांवों में विकास को मिलेगी नई गति

जल संरक्षण से सड़क, स्कूल, पंचायत भवन, आजीविका, कृषि, पशुपालन और आपदा प्रबंधन तक के कार्य शामिल

रायपुर, 20 सितंबर 2026।
CG News Hub। छत्तीसगढ़ में ग्रामीण विकास को रोजगार, आजीविका और स्थायी परिसंपत्तियों के निर्माण से जोड़ने की दिशा में विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) यानी वीबी-जीरामजी का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है। मिशन के तहत अनुमेय कार्यों की संख्या 318 से बढ़ाकर 375 कर दी गई है।

उप मुख्यमंत्री एवं पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री विजय शर्मा ने कहा कि अनुमेय कार्यों की संख्या बढ़ने से ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों को गति मिलेगी और गांवों की अधोसंरचना मजबूत होगी। राज्य सरकार ने वर्ष 2026-27 के बजट में वीबी-जीरामजी के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए 4 हजार करोड़ रुपए का प्रावधान किया है।

उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा छत्तीसगढ़ के लिए वीबी-जीरामजी के तहत 3,354.85 करोड़ रुपए का अंतरिम आवंटन किया गया है। वहीं अकुशल श्रमिकों की मजदूरी दर 261 रुपए से बढ़ाकर 300 रुपए प्रतिदिन की गई है।

4 मुख्य श्रेणियों में 375 कार्य

वीबी-जीरामजी के अंतर्गत 375 अनुमेय कार्यों को 4 मुख्य श्रेणियों और 30 उप-श्रेणियों में व्यवस्थित किया गया है। इनमें व्यक्तिगत कार्य, मरम्मत एवं रखरखाव तथा समूह एवं सामुदायिक उपयोगिता से जुड़े कार्य शामिल हैं। ग्रामीणों को इन कार्यों की विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराने के लिए राज्य में क्यूआर कोड भी जारी किया गया है।

स्कूलों में बालिका शौचालयों पर विशेष जोर

मिशन की कार्य-सूची में शासकीय विद्यालयों की अधोसंरचना को भी प्राथमिकता दी गई है। शौचालयों की मरम्मत, अतिरिक्त कक्ष, प्रयोगशालाएं, रसोई शेड, परिसर की दीवार और खेल मैदान जैसे कार्य किए जा सकेंगे।

राज्य सरकार के ‘मेरी बेटी-मेरा अभिमान’ अभियान के तहत 26 जनवरी 2027 तक ग्रामीण क्षेत्रों के शासकीय विद्यालयों में 6,671 बालिका शौचालयों के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है।

हर गांव में मुक्तिधाम और प्रतीक्षालय की दिशा में पहल

ग्रामीण क्षेत्रों में सामुदायिक अधोसंरचना के विस्तार के लिए हर गांव में मुक्तिधाम निर्माण की दिशा में कार्य किया जा रहा है। 6,524 गांवों में प्रतीक्षालय सहित मुक्तिधाम के निर्माण की दिशा में पहल जारी है। वहीं 10 हजार से अधिक बंद या डिफंक्ट बोरवेलों में सैंड फिल्टर एवं रिचार्ज संरचनाएं विकसित करने की योजना है।

जल संरक्षण और भूजल पुनर्भरण को प्राथमिकता

पहली श्रेणी में जल संरक्षण एवं जल सुरक्षा से जुड़े कार्य शामिल हैं। इनमें चेकडैम, गली प्लग, भूमिगत डाइक, तालाबों का पुनर्जीवन, परकोलेशन टैंक, रिचार्ज पिट, रिचार्ज शाफ्ट, इंजेक्शन वेल, सिंचाई कुएं, ड्रिप सिंचाई चैनल, वनीकरण, पौधरोपण, मृदा-नमी संरक्षण और रूफटॉप वर्षाजल संचयन जैसे कार्य शामिल हैं।

इनसे गांवों में जल संचयन, भूजल पुनर्भरण और सिंचाई सुविधाओं के विस्तार के साथ कृषि भूमि की उत्पादकता बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।

सड़क, स्कूल और पंचायत भवन सहित मजबूत होगी अधोसंरचना

दूसरी श्रेणी में ग्रामीण सड़कें, पुलिया, क्रॉस-ड्रेनेज संरचनाएं, ग्राम पंचायत भवन, आंगनबाड़ी केंद्र, ग्रामीण पुस्तकालय, स्कूल अधोसंरचना, रसोई शेड, अतिरिक्त कक्ष, प्रयोगशालाएं और खेल मैदान जैसे कार्य शामिल हैं।

इसके अलावा श्मशान घाट, कब्रिस्तान, ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन, स्वच्छता परिसर, अपशिष्ट संग्रहण केंद्र, सौर प्रकाश व्यवस्था, बायोगैस प्लांट, पार्किंग एवं परिवहन शेड जैसी सामुदायिक सुविधाओं के विकास को भी अनुमेय बनाया गया है।

ग्रामीण आजीविका और स्थानीय रोजगार के अवसर

तीसरी श्रेणी में आजीविका से जुड़ी अधोसंरचना को शामिल किया गया है। इसके तहत प्रशिक्षण-सह-कौशल विकास केंद्र, स्वयं सहायता समूहों के वर्कशेड, ग्रामीण हाट एवं साप्ताहिक बाजार, कृषि उपज भंडारण, कोल्ड स्टोरेज, वर्मी कम्पोस्ट एवं नाडेप इकाइयां, डेयरी, पशु आश्रय, मत्स्य पालन, नर्सरी और पौधरोपण जैसी गतिविधियों के लिए अधोसंरचना विकसित की जा सकेगी।

मिनी फ्लोर मिल, खाद्य प्रसंस्करण, तेल प्रसंस्करण, वन उत्पाद प्रसंस्करण, हस्तशिल्प, बांस शिल्प और अन्य स्थानीय उत्पादों के प्रसंस्करण से जुड़ी संरचनाएं भी अनुमेय कार्यों में शामिल हैं।

आपदा प्रबंधन के कार्य भी होंगे शामिल

चौथी श्रेणी में आपदा एवं चरम मौसम से निपटने के लिए विभिन्न कार्य शामिल किए गए हैं। इनमें चक्रवात एवं बाढ़ आश्रय, तटबंध, रिटेनिंग वॉल, बाढ़ सुरक्षा दीवार, मिट्टी एवं गेबियन संरचनाएं, आपदा के बाद ग्रामीण सड़कों और सामुदायिक परिसंपत्तियों का पुनर्स्थापन तथा वन अग्नि प्रबंधन से जुड़े कार्य शामिल हैं।

रोजगार के साथ स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण

उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा ने कहा कि वीबी-जीरामजी का उद्देश्य केवल ग्रामीण परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराना नहीं है, बल्कि गांवों की आर्थिक क्षमता बढ़ाना, प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण, स्थानीय आजीविका को मजबूत करना और टिकाऊ ग्रामीण अधोसंरचना विकसित करना भी है। 375 अनुमेय कार्यों के माध्यम से रोजगार को परिसंपत्ति निर्माण और परिसंपत्तियों को ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ने की दिशा में काम किया जा रहा है।

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