
30 मिलीलीटर से अधिक मात्रा में 12% से ज्यादा एथिल अल्कोहल वाली दवाओं को लाइसेंस अनिवार्य, दुरुपयोग रोकने के लिए औषधि नियम 1945 में बड़ा संशोधन।
नई दिल्ली, 10 जुलाई 2026।
केंद्र सरकार ने अधिक मात्रा में एथिल अल्कोहल युक्त औषधीय उत्पादों के दुरुपयोग पर रोक लगाने के उद्देश्य से औषधि नियम, 1945 में महत्वपूर्ण संशोधन किया है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा किए गए इस बदलाव के तहत अब 30 मिलीलीटर से अधिक मात्रा में 12 प्रतिशत से ज्यादा एथिल अल्कोहल वाली दवाओं को बिना लाइसेंस बेचने की छूट समाप्त कर दी गई है।
अब ऐसे सभी औषधीय उत्पादों को औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 के तहत लाइसेंस प्राप्त करना अनिवार्य होगा। साथ ही इन्हें अनुसूची H1 के अंतर्गत शामिल किया गया है, जिसके कारण इनकी बिक्री केवल पंजीकृत चिकित्सक के पर्चे (Prescription) पर ही की जा सकेगी। दवा विक्रेताओं को इनकी बिक्री का पूरा रिकॉर्ड भी निर्धारित नियमों के अनुसार रखना होगा।
पहले क्या व्यवस्था थी?
अब तक इलायची, अदरक और अन्य सुगंधित औषधियों के टिंचर जैसे कुछ उत्पाद अनुसूची ‘के’ के अंतर्गत लाइसेंसिंग से मुक्त थे। इनमें कई उत्पादों में 80 से 90 प्रतिशत तक एथिल अल्कोहल पाया जाता था, जिसके कारण इनके नशे के रूप में दुरुपयोग की शिकायतें विभिन्न राज्यों से सरकार को प्राप्त हुई थीं।
सरकार का उद्देश्य
सरकार का कहना है कि इस संशोधन से अल्कोहल युक्त दवाओं की आपूर्ति केवल अधिकृत और विनियमित दवा आपूर्ति श्रृंखला के माध्यम से होगी। इससे इन दवाओं के दुरुपयोग और अवैध बिक्री पर प्रभावी नियंत्रण लगेगा, जबकि वास्तविक मरीजों को चिकित्सकीय आवश्यकता के अनुसार इनकी उपलब्धता बनी रहेगी।
यह कदम दवाओं के जिम्मेदार उपयोग, नियामक व्यवस्था को मजबूत करने और सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा की दिशा में केंद्र सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

