




रायपुर/बलोद, 10 जुलाई 2026।
जेएसजेबी 2.0 के तहत ग्राम पंचायतों, ग्रामीणों और प्रशासन के सामूहिक प्रयास से जल संरक्षण को मिली नई दिशा, भूजल स्तर बढ़ाने और सिंचाई सशक्त बनाने में मिली बड़ी सफलता।
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा मन की बात कार्यक्रम में दिए गए #कैच द रेन अभियान को गति देने के आह्वान के बाद छत्तीसगढ़ का बलोद जिला देशभर में जनभागीदारी आधारित जल संरक्षण का प्रेरक मॉडल बनकर उभरा है। जल संचय जन भागीदारी (JSJB) 2.0 के तहत जिले में जून 2025 से मई 2026 के बीच 2,84,917 जल संरक्षण एवं भूजल पुनर्भरण संरचनाओं का निर्माण कर वर्षा जल संचयन की दिशा में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की गई है।
ग्राम पंचायतों, स्थानीय समुदायों और जिला प्रशासन के संयुक्त प्रयासों से तैयार की गई इन संरचनाओं का सकारात्मक प्रभाव इस मानसून में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। जहां पहले बारिश का पानी बहकर व्यर्थ चला जाता था, वहीं अब उसे संरक्षित कर भूजल स्तर बढ़ाने और सिंचाई व्यवस्था मजबूत करने में उपयोग किया जा रहा है।
गांवों में दिखा बदलाव
बलोद जिले के कई गांवों में जल संरक्षण के अभिनव मॉडल सफल साबित हुए हैं। ग्राम पंचायत मुंडेरा में बोरवेल के पास बनाए गए रिचार्ज गड्ढे वर्षा जल को सीधे भूजल में पहुंचा रहे हैं। कोंगनी में पुनर्भरण गड्ढे, ओदरसाकरी और खुटेरी में बने चेक डैम, बंद पड़े बोरवेलों में रिचार्ज शाफ्ट तथा भाथागांव (आर) में कंटूर ट्रेंच जैसी संरचनाओं ने जल संरक्षण और कृषि को नई मजबूती दी है। सामुदायिक बांधों से आसपास के गांवों और किसानों को भी लाभ मिल रहा है।
तावेरा नाला पुनर्जीवन बना मिसाल
गंदरदेही विकासखंड के भाथागांव (आर) स्थित तावेरा नाला का पुनर्जीवन इस अभियान की सबसे बड़ी उपलब्धियों में शामिल है। करीब 14.3 किलोमीटर लंबे नाले के पुनरुद्धार के लिए 6,250 से अधिक जल संरक्षण संरचनाएं बनाई गई हैं, जिनमें चेक डैम, सोक पिट, मैजिक पिट, इंजेक्शन वेल, वर्षा जल संचयन प्रणाली और ग्रे-वॉटर ट्रीटमेंट जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं।
इस परियोजना से लगभग 6.5 करोड़ लीटर अतिरिक्त वर्षा जल संरक्षण होने तथा भूजल स्तर में 5 से 10 फीट तक वृद्धि की संभावना जताई गई है। इससे सिंचाई, कृषि उत्पादन और पर्यावरण संरक्षण को भी बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है।
राष्ट्रीय स्तर पर मिला सम्मान
बलोद जिला इससे पहले भी जल संरक्षण में अपनी पहचान बना चुका है। JSJB 1.0 के तहत जिले ने 1.06 लाख से अधिक जल संरक्षण संरचनाओं का निर्माण किया था, जिसके लिए #कैच द रेन अभियान में राष्ट्रीय स्तर पर तीसरा स्थान तथा पूर्वी क्षेत्र में प्रथम स्थान प्राप्त हुआ। इस उत्कृष्ट कार्य के लिए जिले को राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित भी किया जा चुका है।
जन आंदोलन बन रहा जल संरक्षण
बलोद की सफलता यह साबित करती है कि जब प्रशासन और समाज मिलकर काम करते हैं तो जल संकट जैसी बड़ी चुनौती का भी प्रभावी समाधान संभव है। जिले का यह मॉडल देशभर में जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने की दिशा में एक प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभरा है और प्रधानमंत्री के “हर बूंद बचाने” के संकल्प को मजबूत कर रहा है।

