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प्रणय मिश्रा
जर्जर भवन, बदहाल शौचालय, पेयजल और खेल मैदान की स्थिति पर उठे सवाल; सुधार नहीं हुआ तो आंदोलन, चक्काजाम और तालाबंदी की चेतावनी
बांकीमोंगरा। बांकीमोंगरा स्थित सनसाइन हायर सेकेंडरी स्कूल की व्यवस्थाओं को लेकर अब जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है। विद्यालय भवन की जर्जर स्थिति, शौचालय, पेयजल, खेल मैदान सहित विद्यार्थियों को मिलने वाली मूलभूत सुविधाओं को लेकर सवाल उठाते हुए वार्ड क्रमांक 05 के पार्षद फणीधर कर्ष ने जिला शिक्षा अधिकारी को लिखित शिकायत सौंपकर विद्यालय का तत्काल निरीक्षण कराने और व्यवस्थाओं में सुधार की मांग की है।
शिकायत में विद्यालय भवन की स्थिति के साथ विद्यार्थियों के लिए स्वच्छ एवं व्यवस्थित शौचालय, सुरक्षित पेयजल, खेल मैदान, विज्ञान एवं कंप्यूटर लैब तथा पुस्तकालय जैसी सुविधाओं का मुद्दा उठाया गया है। पेयजल व्यवस्था की स्वच्छता और सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई गई है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि मामला सीधे तौर पर विद्यार्थियों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और बेहतर शिक्षा के वातावरण से जुड़ा है।
फीस के बदले सुविधाएं क्यों नहीं?
विद्यालय की व्यवस्थाओं को लेकर जनप्रतिनिधि एवं अधिवक्ता अमित सिन्हा ने भी नाराजगी जताई है। उन्होंने विद्यालय का निरीक्षण किए जाने का हवाला देते हुए कहा कि कई व्यवस्थाएं संतोषजनक स्थिति में नहीं हैं। उनका सवाल है कि जब विद्यार्थियों से फीस ली जा रही है तो उन्हें आवश्यक मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने में कमी क्यों दिखाई दे रही है।
अमित सिन्हा ने विद्यालय परिसर में मवेशियों के घूमने जैसी स्थिति का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बच्चों की सुरक्षा और भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि एक माह के भीतर व्यवस्थाओं में ठोस सुधार नहीं हुआ तो आंदोलन और चक्काजाम किया जाएगा। इसके बावजूद स्थिति में सुधार नहीं होने पर विद्यालय में तालाबंदी तक की चेतावनी दी गई है।
बच्चों के भविष्य के लिए एक साल की पार्षद निधि देने की सहमति
मामले में एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी सामने आया है कि वार्ड क्रमांक 05 के पार्षद फणीधर कर्ष ने विद्यालय की आवश्यक सुविधाओं में सुधार और बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए जरूरत पड़ने पर अपनी एक वर्ष की पार्षद निधि तक देने की सहमति जताई है।
इस पहल के बाद सवाल और गंभीर हो जाता है कि यदि विद्यालय की सुविधाओं में सुधार के लिए स्थानीय स्तर पर संसाधन उपलब्ध कराने की पहल हो रही है, तो विद्यालय में उपलब्ध संसाधनों और रखरखाव की व्यवस्था का प्रभावी उपयोग क्यों नहीं हो रहा है?
SECL से हर साल मिलती है लाखों रुपये की रखरखाव राशि
विद्यालय के प्राचार्य सुरेश यादव ने बताया कि नगर पालिका के जनप्रतिनिधियों की ओर से विद्यालय की समस्याओं को लेकर आवेदन प्राप्त हुआ है। इसमें एक माह के भीतर व्यवस्थाओं में सुधार की मांग की गई है। प्राचार्य के अनुसार आवेदन को शाला विकास समिति के समक्ष रखा जाएगा और समिति के निर्णय के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
प्राचार्य ने बताया कि SECL प्रबंधन की ओर से विद्यालय भवन के रखरखाव के लिए प्रतिवर्ष राशि उपलब्ध कराई जाती है। उनके अनुसार पिछले सत्र में लगभग 4 लाख 27 हजार रुपये, जबकि इस वर्ष करीब 5 लाख 22 हजार रुपये प्राप्त हुए हैं। उन्होंने बताया कि बरसात समाप्त होने के बाद विद्यालय भवन में आवश्यक मरम्मत कार्य कराया जाना प्रस्तावित है।
लाखों की राशि के बावजूद बदहाली क्यों?
SECL से भवन के रखरखाव के लिए प्रतिवर्ष लाखों रुपये मिलने की जानकारी सामने आने के बाद विद्यालय की मौजूदा स्थिति को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। यदि रखरखाव के लिए राशि उपलब्ध हो रही है तो भवन की जर्जर स्थिति क्यों बनी हुई है? प्राप्त राशि का उपयोग किन कार्यों में किया गया? क्या भवन का नियमित निरीक्षण होता है? क्या विद्यार्थियों के लिए शौचालय और पेयजल व्यवस्था की समय-समय पर समीक्षा की जाती है?
इन सवालों का जवाब अब विभागीय जांच और विद्यालय प्रबंधन की ओर से सामने आने वाली जानकारी के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
VHP ने भी जताई चिंता
विद्यालय की व्यवस्थाओं को लेकर विश्व हिंदू परिषद के जिला अध्यक्ष अमरजीत सिंह ने भी चिंता जताई है। उन्होंने बताया कि पार्षद फणीधर कर्ष की ओर से आवेदन मिलने के बाद विद्यालय की स्थिति का जायजा लिया गया।
अमरजीत सिंह के अनुसार विद्यालय में शौचालय, पेयजल और खेल मैदान जैसी मूलभूत सुविधाओं की स्थिति चिंताजनक बताई गई है। उन्होंने कहा कि बच्चों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और भविष्य को ध्यान में रखते हुए विद्यालय प्रबंधन को सुधार के लिए एक माह का समय दिया गया है। निर्धारित अवधि में सुधार नहीं होने पर बड़े स्तर पर आंदोलन किए जाने की चेतावनी भी दी गई है।
अब शिक्षा विभाग की परीक्षा
पूरे मामले में अब जिला शिक्षा विभाग और प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है। शिकायतकर्ता ने शिक्षा विभाग एवं प्रशासनिक अधिकारियों की संयुक्त टीम गठित कर विद्यालय का तत्काल भौतिक निरीक्षण कराने की मांग की है।
मांग की गई है कि विद्यालय के जर्जर भवन की मरम्मत के साथ स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल, व्यवस्थित शौचालय, प्रयोगशालाओं, पुस्तकालय और खेल मैदान जैसी मूलभूत सुविधाओं को दुरुस्त कराया जाए।
जांच में क्या सामने आएगा, इस पर नजर
यदि शिकायत में लगाए गए आरोप जांच में सही पाए जाते हैं तो रखरखाव के लिए प्राप्त राशि के उपयोग की भी जांच आवश्यक होगी। साथ ही यह भी देखा जाना होगा कि विद्यालय की शाला विकास समिति द्वारा सुविधाओं की निगरानी किस स्तर पर की जाती है और विद्यार्थियों से ली जाने वाली फीस के अनुरूप उन्हें आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हो रही हैं या नहीं।
फिलहाल जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों की ओर से एक माह का अल्टीमेटम दिया गया है। अब निगाहें जिला शिक्षा विभाग और प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि निर्धारित समय में व्यवस्थाओं में ठोस सुधार नहीं हुआ तो आंदोलन, चक्काजाम और तालाबंदी की चेतावनी के बाद मामला और गरमा सकता है।



