

बांकीमोंगरा, 25 अगस्त 2026। नगर पालिका परिषद बांकीमोंगरा में प्रेसिडेंट-इन-काउंसिल (पीआईसी) के सदस्य में बदलाव किया गया है। नगर पालिका परिषद के मुख्य नगर पालिका अधिकारी द्वारा जारी आदेश के अनुसार पीआईसी सदस्य दिलीप दास की सदस्यता समाप्त करते हुए वार्ड क्रमांक 13 के पार्षद अश्वनी कुमार मिश्रा को प्रेसिडेंट-इन-काउंसिल में सदस्य के रूप में शामिल किया गया है।
जारी आदेश के अनुसार अश्वनी कुमार मिश्रा को राजस्व एवं बाजार समिति का सभापति भी नामित किया गया है। आदेश में छत्तीसगढ़ नगर पालिका अधिनियम, 1961 की धारा 70 के तहत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग किए जाने का उल्लेख है।
हालांकि पीआईसी में हुए इस बदलाव के बाद नगर पालिका की राजनीतिक और प्रशासनिक कार्यप्रणाली को लेकर कई विचारणीय प्रश्न भी सामने आ रहे हैं। खासकर यह सवाल चर्चा में है कि पीआईसी जैसे महत्वपूर्ण पद के लिए निर्णय लेते समय किन मानदंडों को प्राथमिकता दी गई और इस बदलाव की वास्तविक वजह क्या है।
विचारणीय प्रश्न
1. पहले योग्य व्यक्ति का चुनाव क्यों नहीं?
यदि राजस्व एवं बाजार समिति जैसे महत्वपूर्ण विभाग की जिम्मेदारी किसी पार्षद को दी जानी थी, तो क्या शुरुआत से ही उसकी योग्यता, अनुभव और संबंधित कार्यों की क्षमता को ध्यान में रखकर चयन नहीं किया जाना चाहिए था? सवाल यह भी है कि पूर्व में गठित पीआईसी में योग्य व्यक्ति के चयन की प्रक्रिया किन आधारों पर तय की गई थी।
2. क्या यह दिलीप दास की क्षतिपूर्ति से जुड़ा निर्णय है?
दिलीप दास के पीआईसी से हटाए जाने को लेकर भी राजनीतिक हलकों में चर्चा हो सकती है। क्या यह बदलाव केवल प्रशासनिक आवश्यकता के तहत किया गया है या इसके पीछे नगर पालिका अध्यक्ष के साथ उनके मतभेद अथवा विरोध की राजनीतिक पृष्ठभूमि भी है? क्या उन्हें हटाए जाने के बाद किसी अन्य रूप में क्षतिपूर्ति या समायोजन किए जाने की कोई संभावना अथवा चर्चा है? इन सवालों का स्पष्ट जवाब नगर पालिका प्रशासन या संबंधित जनप्रतिनिधियों की ओर से सामने आना महत्वपूर्ण होगा।
पूर्व PIC सदस्य दिलीप दास से संपर्क का प्रयास, सवालों पर साधी चुप्पी
इस पूरे मामले में पूर्व PIC सदस्य दिलीप दास से भी उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन वे किसी भी प्रकार की टिप्पणी करने से बचते नजर आए।
वहीं, सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार 24 अगस्त 2026 को तालाबंदी और घेराव से जुड़े घटनाक्रम में उनकी अहम भूमिका होने की बात सामने आई थी। सूत्रों के मुताबिक पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोपों के चलते उन्हें PIC सदस्य के पद से हटाया गया था। हालांकि, इन आरोपों पर दिलीप दास की ओर से कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
ऐसे में यह सवाल भी उठता है कि यदि किसी सदस्य को पार्टी विरोधी गतिविधियों और विवादित घटनाक्रम में भूमिका के चलते जिम्मेदारी से हटाया गया था, तो वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों में इस घटनाक्रम को किस नजरिए से देखा जाए? क्या यह निर्णय केवल प्रशासनिक आवश्यकता है या इसके पीछे कोई राजनीतिक समीकरण भी काम कर रहा है?
विचारणीय प्रश्न
- पहले योग्य व्यक्ति का चुनाव क्यों नहीं किया गया?
- क्या यह निर्णय अध्यक्ष महोदय के विरोध में जा चुके दिलीप दास को किसी प्रकार की क्षतिपूर्ति देने के रूप में देखा जा सकता है?
- क्या अश्वनी मिश्रा को दिए गए विभाग में उन्हें निर्णय लेने की पूर्ण स्वतंत्रता मिलेगी?
- यदि 24 अगस्त के तालाबंदी और घेराव के घटनाक्रम में दिलीप दास की भूमिका की बात सामने आई थी, तो उन्हें PIC सदस्य के पद से हटाए जाने के वास्तविक कारण क्या थे?
- क्या वर्तमान नियुक्ति और पूर्व घटनाक्रम के बीच कोई राजनीतिक संबंध है, या यह पूरी तरह प्रशासनिक निर्णय है?
3. क्या अश्वनी मिश्रा को विभागीय निर्णयों की पूर्ण स्वतंत्रता मिलेगी?
राजस्व एवं बाजार समिति की जिम्मेदारी मिलने के बाद सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या सभापति अश्वनी कुमार मिश्रा को अपने विभाग से जुड़े निर्णय लेने और कार्यों को आगे बढ़ाने में वास्तविक प्रशासनिक एवं राजनीतिक स्वतंत्रता मिलेगी? क्या उन्हें समिति के अधिकार क्षेत्र में आने वाले मामलों पर स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने का अवसर मिलेगा या महत्वपूर्ण फैसलों में किसी अन्य स्तर का हस्तक्षेप रहेगा?
पीआईसी नगर पालिका की निर्णय प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। ऐसे में सदस्य परिवर्तन केवल पदों का फेरबदल न होकर नगर पालिका के कामकाज और निर्णय प्रक्रिया पर भी असर डाल सकता है। इसलिए इस बदलाव को लेकर उठ रहे सवालों पर नगर पालिका नेतृत्व की स्पष्ट स्थिति सामने आना जरूरी माना जा रहा है।
अब देखना होगा कि अश्वनी कुमार मिश्रा को मिली नई जिम्मेदारी के बाद राजस्व एवं बाजार समिति किस तरह काम करती है और उन्हें निर्णय लेने की कितनी स्वतंत्रता मिलती है।

